बाल संरक्षण आयोग की सख्ती, स्कूलों में 1098 हेल्पलाइन अनिवार्य, खेल मैदानों के व्यावसायिक उपयोग पर रोक
छत्तीसगढ़ राज्य बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने धमतरी में आयोजित समीक्षा बैठक में बच्चों की सुरक्षा और अधिकारों को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए। स्कूलों में 1098 चाइल्ड हेल्पलाइन प्रदर्शित करना अनिवार्य किया गया है, खेल मैदानों के व्यावसायिक उपयोग पर रोक लगाने, ड्रॉपआउट बच्चों की ट्रैकिंग, पॉक्सो जागरूकता और स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया।
UNITED NEWS OF ASIA. छत्तीसगढ़ राज्य बाल संरक्षण आयोग ने बच्चों की सुरक्षा, शिक्षा और अधिकारों को लेकर महत्वपूर्ण पहल करते हुए प्रदेशभर में कई अहम निर्देश जारी किए हैं। आयोग की अध्यक्ष वर्णिका शर्मा ने धमतरी जिला मुख्यालय में आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान स्पष्ट किया कि बच्चों के खेल मैदानों का किसी भी स्थिति में व्यावसायिक उपयोग नहीं किया जाएगा। जिन मैदानों का उपयोग अन्य गतिविधियों के लिए किया जा रहा है, उन्हें तत्काल मुक्त कराकर बच्चों के खेलकूद के लिए उपलब्ध कराया जाए।
समीक्षा बैठक में कलेक्टर अबिनाश मिश्रा, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी, पुलिस विभाग, शिक्षा विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग तथा जिला बाल संरक्षण इकाई के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक में बच्चों के समग्र विकास, सुरक्षित वातावरण और उनके अधिकारों की रक्षा से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक में सबसे महत्वपूर्ण निर्णयों में से एक यह रहा कि प्रदेश के सभी सरकारी और निजी विद्यालयों की दीवारों तथा प्रमुख स्थानों पर चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 के साथ संबंधित बाल कल्याण पुलिस अधिकारी का नाम और संपर्क नंबर अनिवार्य रूप से प्रदर्शित किया जाएगा। आयोग का मानना है कि इससे किसी भी संकट की स्थिति में बच्चों और अभिभावकों को तत्काल सहायता उपलब्ध कराने में आसानी होगी।
अध्यक्ष वर्णिका शर्मा ने पिछले तीन वर्षों में स्कूल छोड़ चुके बच्चों की घर-घर जाकर जांच और सत्यापन करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाए कि कोई भी बच्चा बाल श्रम, बाल विवाह, मानव तस्करी या अन्य प्रकार के शोषण का शिकार न हो। ऐसे बच्चों की पहचान कर उन्हें दोबारा शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए संबंधित विभाग समन्वय के साथ कार्य करें।
बैठक में विद्यालयों की आधारभूत सुविधाओं को लेकर भी गंभीरता दिखाई गई। आयोग ने सभी स्कूलों में छात्र और छात्राओं के लिए अलग-अलग स्वच्छ शौचालय, शुद्ध पेयजल की व्यवस्था तथा पर्याप्त खेल सामग्री उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। विशेष रूप से जर्जर शौचालयों की मरम्मत और छात्राओं के लिए सुरक्षित एवं सम्मानजनक वातावरण सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।
पुलिस विभाग को पॉक्सो (POCSO) कानून के प्रति समाज में व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए गए। साथ ही प्रत्येक थाने में बाल कल्याण अधिकारी का नाम और संपर्क विवरण प्रमुखता से प्रदर्शित करने को कहा गया, ताकि बच्चों से जुड़े मामलों में त्वरित सहायता और संवेदनशील कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। अध्यक्ष ने कहा कि बच्चों को सुरक्षित, स्वच्छ और भयमुक्त वातावरण उपलब्ध कराना सरकार और समाज की साझा जिम्मेदारी है तथा बच्चों के अधिकारों से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
बैठक के दौरान धमतरी जिले में बच्चों के हित में किए जा रहे कार्यों की भी समीक्षा की गई। जानकारी दी गई कि खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा जिले के 81 मिनी स्टेडियमों में खेल गतिविधियां संचालित की जा रही हैं तथा 36 प्रशिक्षण केंद्रों के माध्यम से 1,160 खिलाड़ियों को नियमित प्रशिक्षण दिया जा रहा है। शिक्षा विभाग ने 1,076 विद्यालयों में से जर्जर शौचालयों के स्थान पर 34 बालिका एवं 84 बालक शौचालयों के निर्माण का प्रस्ताव जिला पंचायत को भेजा है। वहीं जिला बाल संरक्षण इकाई ने जून 2026 में विशेष अभियान चलाकर छह बालिकाओं और बाल श्रम में लगे एक बालक का रेस्क्यू किया, जबकि पिछले तीन वर्षों में कुल 30 बच्चों का सफल पुनर्वास किया जा चुका है।
बैठक के अंत में वर्णिका शर्मा ने सभी विभागों को बेहतर समन्वय के साथ बच्चों से जुड़ी योजनाओं को संवेदनशीलता, पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ लागू करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बच्चों का सुरक्षित बचपन ही विकसित समाज और सशक्त राज्य की सबसे मजबूत नींव है।