करंट लगने से बाघ की मौत, बालाघाट के कटंगी में वन विभाग की कार्यप्रणाली पर फिर उठे सवाल
बालाघाट जिले के कटंगी क्षेत्र में एक बाघ की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। प्रारंभिक जांच में करंट लगने से मौत की आशंका जताई जा रही है। घटना के बाद वन विभाग की सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
UNITED NEWS OF ASIA.पिंटू गुप्ता, कटंगी | बालाघाट मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले से एक बार फिर बाघ की मौत का मामला सामने आया है, जिसने वन विभाग की कार्यप्रणाली और वन्यजीव सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़े कर दिए हैं। कटंगी वन परिक्षेत्र अंतर्गत आंजनबिहरी गांव के जंगल में घोडदेव बाबा मंदिर के पास कक्ष क्रमांक 562 में एक बाघ मृत अवस्था में पाया गया। इस घटना से क्षेत्र में हड़कंप मच गया है।
जानकारी के अनुसार, गुरुवार की शाम कुछ ग्रामीण घोडदेव बाबा मंदिर की ओर गए थे। इस दौरान जंगल क्षेत्र से तेज दुर्गंध आने पर ग्रामीणों को संदेह हुआ। जब उन्होंने पास जाकर देखा तो एक बाघ जमीन पर पड़ा हुआ दिखाई दिया। काफी देर तक कोई हलचल नहीं होने पर ग्रामीणों ने नजदीक जाकर जांच की, जहां बाघ मृत अवस्था में मिला। इसके बाद तत्काल कटंगी वन विभाग को इसकी सूचना दी गई।
सूचना मिलते ही वन विभाग का अमला वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंचा। वन विभाग ने पूरे क्षेत्र को सील कर दिया, ताकि किसी भी प्रकार के साक्ष्य के साथ छेड़छाड़ न हो सके। बाघ के शव को कब्जे में लेकर नियमानुसार पंचनामा कार्रवाई की गई और शुक्रवार को पोस्टमार्टम के बाद अंतिम संस्कार किया गया।
प्रारंभिक जांच में बाघ की मौत का कारण बिजली का करंट लगना प्रतीत हो रहा है। हालांकि, मामले की गंभीरता को देखते हुए विस्तृत जांच के लिए कान्हा राष्ट्रीय उद्यान और बालाघाट से डॉग स्क्वाड टीम को भी बुलाया गया है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि करंट जानबूझकर बिछाया गया था या यह किसी अन्य लापरवाही का परिणाम है।
वन विभाग के अनुसार प्रारंभिक निरीक्षण में बाघ के पंजे, नाखून सहित शरीर के सभी अंग सुरक्षित पाए गए हैं, जिससे शिकार की आशंका फिलहाल कम मानी जा रही है। बावजूद इसके, लगातार हो रही बाघों की मौतें वन्यजीव संरक्षण को लेकर विभागीय दावों पर सवाल खड़े कर रही हैं।
स्थानीय ग्रामीणों और पर्यावरण प्रेमियों ने घटना पर चिंता व्यक्त करते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। अब सबकी निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि इस दुर्लभ वन्यजीव की मौत के लिए जिम्मेदार कौन है।