बैलाडीला पहाड़ियों में बाघ आवास पर बढ़ा ध्यान, राजा बंगला और रानी घाट क्षेत्र प्रमुख
दंतेवाड़ा की बैलाडीला पहाड़ियों के राजा बंगला और रानी घाट क्षेत्र को बाघों का महत्वपूर्ण आवास बताया गया है। सर्वेक्षण, कैमरा ट्रैप और स्थानीय साक्ष्यों से बाघों की मौजूदगी की पुष्टि हुई है, जिससे वन्यजीव संरक्षण पर नया फोकस बढ़ा है।
UNITED NEWS OF ASIA. नविन चौधरी, बचेली तन्तेवाडा | छत्तीसगढ़ के दक्षिणी हिस्से में स्थित दंतेवाड़ा जिले की बैलाडीला पहाड़ियाँ एक बार फिर वन्यजीव संरक्षण के दृष्टिकोण से चर्चा में हैं। वन एवं वन्य प्राणियों के संरक्षण के लिए कार्यरत प्राणी संरक्षण कल्याण समिति और वन विभाग के अनुसार, बैलाडीला क्षेत्र के राजा बंगला और रानी घाट सेक्शन बाघों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण प्राकृतिक आवास हैं।
इन क्षेत्रों की भौगोलिक संरचना बाघ जैसे बड़े मांसाहारी वन्यजीवों के लिए अनुकूल मानी जाती है। यहां घने जंगल, दुर्गम पहाड़ी भू-भाग, बड़े घास के मैदान, दलदली क्षेत्र, बारहमासी जल स्रोत और शिकार प्रजातियों की भरपूर उपलब्धता है। हाल के सर्वेक्षणों के दौरान कैमरा ट्रैप, पंजों के निशान, खरोंच के निशान और अन्य अप्रत्यक्ष संकेतों के माध्यम से राजा बंगला–रानी घाट क्षेत्र में बाघों की गतिविधियों के प्रमाण मिले हैं।
प्राणी संरक्षण कल्याण समिति का कहना है कि वे पिछले तीन वर्षों से बैलाडीला पहाड़ियों में बाघों की मौजूदगी से जुड़े साक्ष्य एकत्र कर रहे थे, लेकिन इसके बावजूद NMDC प्रशासन द्वारा लंबे समय तक इस तथ्य से इनकार किया जाता रहा। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2021 में इसी क्षेत्र से बाघ के शिकार की पुष्टि भी हो चुकी है, जो वहां बाघों की उपस्थिति को स्पष्ट रूप से दर्शाती है।
यह क्षेत्र छत्तीसगढ़ और पड़ोसी राज्यों के जंगलों को जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण प्राकृतिक गलियारा (कॉरिडोर) भी है। यहां सांभर, मूषक हिरण, बार्किंग हिरण (कोडरी), जंगली सूअर, मकाक बंदर और लंगूर जैसी शिकार प्रजातियों की उपस्थिति बाघों के लिए उपयुक्त वातावरण तैयार करती है।
स्थानीय ग्रामीणों द्वारा भी समय-समय पर बाघ दिखने और मवेशियों के शिकार की घटनाओं की जानकारी दी गई है। इसे देखते हुए वन विभाग और प्राणी संरक्षण कल्याण समिति ने गश्त बढ़ाने, जन-जागरूकता अभियान चलाने और मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए विशेष कदम उठाने की आवश्यकता बताई है।
समिति का मानना है कि राजा बंगला और रानी घाट क्षेत्र न केवल बाघों, बल्कि तेंदुआ, भालू, सियार, धारीदार लकड़बग्घा, दुर्लभ पक्षी, सरीसृप, तितलियों और अत्यंत दुर्लभ पेंगोलिन जैसी प्रजातियों के संरक्षण के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण हैं। यदि वैज्ञानिक निगरानी, स्थानीय समुदाय की भागीदारी और वन गलियारों की सख्त सुरक्षा सुनिश्चित की जाए, तो भविष्य में बैलाडीला पहाड़ियों का यह क्षेत्र बाघ संरक्षण का एक प्रमुख केंद्र बन सकता है।