वायु प्रदूषण और बदलते मौसम से बढ़ते रोगों पर रोक को लेकर जिला स्तरीय प्रशिक्षण आयोजित
कवर्धा जिले में जलवायु परिवर्तन एवं मानव स्वास्थ्य कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु जिला स्तरीय प्रशिक्षण आयोजित किया गया। प्रशिक्षण में वायु प्रदूषण और बदलते मौसम से बढ़ते रोगों की रोकथाम, पर्यावरण संरक्षण और जनजागरूकता पर विशेष जोर दिया गया।
UNITED NEWS OF ASIA. कवर्धा। जिले में वायु प्रदूषण एवं बदलते मौसम के कारण मानव स्वास्थ्य पर पड़ रहे दुष्प्रभावों की रोकथाम के उद्देश्य से जलवायु परिवर्तन एवं मानव स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत जिला स्तरीय प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। यह प्रशिक्षण जिला पंचायत के सभाकक्ष में संपन्न हुआ, जिसमें जिले के सभी विकासखंडों के सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों ने भाग लिया।
प्रशिक्षण में मॉस्टर ट्रेनर के रूप में जलवायु परिवर्तन एवं स्वास्थ्य सलाहकार रायपुर की पुनिता कुमार ने उपस्थित अधिकारियों को जलवायु परिवर्तन के कारण, प्रभाव और उससे निपटने की रणनीतियों की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जलवायु परिवर्तन एक वैश्विक समस्या है, जिसका मुख्य कारण वन विनाश, जीवाश्म ईंधनों का अत्यधिक उपयोग और औद्योगिक प्रदूषण है। इसके दुष्परिणाम ग्रामीण एवं शहरी दोनों क्षेत्रों में स्पष्ट रूप से देखे जा रहे हैं।
कुमार ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण वर्षा एवं मौसम के पैटर्न में बदलाव, फसलों की उत्पादकता में कमी, पशु-पक्षियों के व्यवहार में परिवर्तन, आकाशीय बिजली की घटनाओं तथा सर्पदंश के मामलों में वृद्धि देखी जा रही है। इसके साथ ही हवा, जल, मृदा और कृषि पर भी इसका गंभीर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है, जो अंततः मानव स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहा है।
प्रशिक्षण के दौरान मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. डी.के. तुर्रे ने वायु प्रदूषण से उत्पन्न स्वास्थ्य समस्याओं पर प्रकाश डालते हुए बताया कि वर्तमान समय में अस्पतालों में सांस फूलना, लगातार खांसी, आंखों में जलन, त्वचा रोग एवं अस्थमा जैसे मामलों में वृद्धि हो रही है, जो वायु प्रदूषण की गंभीरता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि स्वच्छ वातावरण ही स्वस्थ समाज की मजबूत नींव है।
स्वास्थ्य विभाग द्वारा आम नागरिकों से अपील की गई कि वे पर्यावरण संरक्षण को अपनी प्राथमिक जिम्मेदारी मानें। अधिक से अधिक वृक्षारोपण करें, जल स्रोतों का संरक्षण करें, वर्षा जल संचयन अपनाएं, प्लास्टिक का न्यूनतम उपयोग करें, स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा दें तथा कचरे का पृथक्करण और पुनर्चक्रण सुनिश्चित करें।
यह प्रशिक्षण राज्य शासन के निर्देशानुसार कलेक्टर गोपाल वर्मा के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया। कार्यक्रम का संचालन जिला कार्यक्रम प्रबंधक अनुपमा तिवारी द्वारा किया गया। इस अवसर पर जलवायु परिवर्तन कार्यक्रम की जिला नोडल अधिकारी डॉ. अनामिका पटेल एवं जिला एपिडेमियोलॉजिस्ट नेतराम साहू ने सक्रिय सहभागिता निभाई।