प्रशासकीय निष्पक्षता बनाम राजनीतिक दबाव: क्या व्यक्तिगत स्वार्थ बन रहे हैं विकास की राह में रोड़ा?
मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (MCB) जिले में राजनीतिक हस्तक्षेप और प्रशासनिक निष्पक्षता के टकराव ने विकास की गति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कलेक्टर राहुल वेंकट के खिलाफ धरना प्रदर्शन की घोषणा ने यह बहस तेज कर दी है कि क्या अधिकारियों पर दबाव बनाना जनहित में है या व्यक्तिगत स्वार्थ विकास में बाधा बन रहे हैं।
UNITED NEWS OF ASIA. प्रदीप पाटकर, कोरिया | मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (MCB) जैसे नवगठित जिले के लिए प्रशासनिक स्थिरता विकास की बुनियाद होती है, लेकिन दुर्भाग्यवश यह जिला इन दिनों विकास कार्यों से अधिक “राजनीति बनाम प्रशासन” के टकराव को लेकर चर्चा में है। ताजा मामला जिले के कलेक्टर एवं प्रथम नागरिक IAS राहुल वेंकट के विरुद्ध पूर्व विधायक गुलाब कमरो द्वारा धरना प्रदर्शन की घोषणा का है। इस घटनाक्रम ने एक गंभीर प्रश्न खड़ा कर दिया है—क्या जनसेवा के नाम पर अधिकारियों का मनोबल तोड़ना जिले के हित में है?
जिले के गठन के बाद से अब तक कोई भी IAS अधिकारी यहां एक वर्ष का कार्यकाल पूरा नहीं कर सका है। प्रशासनिक जानकारों के अनुसार, इसका प्रमुख कारण लगातार बढ़ता राजनीतिक हस्तक्षेप है। जब अधिकारी नियमों के अनुरूप निष्पक्ष निर्णय लेने का प्रयास करते हैं, तो उन्हें राजनीतिक दबाव और विरोध का सामना करना पड़ता है। यह स्थिति प्रशासनिक अस्थिरता को जन्म दे रही है, जिसका सीधा असर विकास योजनाओं पर पड़ता है।
लोकतंत्र में संविधान और कानून सर्वोच्च होते हैं। जिला दंडाधिकारी का दायित्व नियमों का पालन कराना होता है, न कि किसी व्यक्ति या राजनीतिक दल की इच्छाओं को प्राथमिकता देना। वर्तमान स्थिति यह बन गई है कि यदि कोई अधिकारी नेताओं के संरक्षण में चल रहे कार्यों पर सवाल उठाता है, तो उसे ‘जनविरोधी’ करार देकर घेर लिया जाता है।
प्रशासनिक विश्लेषकों का मानना है कि अधिकारियों के बार-बार स्थानांतरण या उनके विरुद्ध अनावश्यक आंदोलन न केवल सरकारी मशीनरी को कमजोर करते हैं, बल्कि आम जनता के जरूरी कार्य भी बाधित होते हैं। एक योग्य IAS अधिकारी की कलम यदि राजनीतिक दबाव में काम करने लगे, तो निष्पक्ष शासन की कल्पना ही समाप्त हो जाती है।
कलेक्टर राहुल वेंकट अपनी सख्त और नियम आधारित कार्यशैली के लिए जाने जाते हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद एक नवगठित जिले में प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करना आसान कार्य नहीं है। ऐसे में नियमों का पालन करने वाले अधिकारी को समर्थन मिलना चाहिए, न कि राजनीतिक विरोध का सामना करना पड़े।
यदि MCB जिले को विकास की ऊंचाइयों तक ले जाना है, तो आवश्यक है कि राजनीतिक नेतृत्व अपनी भूमिका पर आत्ममंथन करे। अधिकारियों को डराने या उन्हें राजनीति का मोहरा बनाने के बजाय यदि प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच समन्वय स्थापित हो, तभी लोकतंत्र की मूल भावना और जिले का वास्तविक विकास संभव हो सकेगा।