उत्तम जायसवाल ने कहा कि प्रदेश के अनियमित कर्मचारियों के लिए बजट में कोई ठोस प्रावधान नहीं किया गया है। महिला सुरक्षा के मुद्दे को भी पूरी तरह नजरअंदाज किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि रसोइया संघ की मांगों को एक बार फिर अनदेखा कर दिया गया। साथ ही उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष पेट्रोल पर वैट में कटौती कर आम लोगों को एक रुपये प्रति लीटर की राहत दी गई थी, लेकिन इस बार जनता को केवल निराशा हाथ लगी है।
उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना का जिक्र करते हुए कहा कि पंचायत राज के अंतर्गत पिछले वर्ष 8,500 करोड़ रुपये का प्रावधान किए जाने के बावजूद आज भी लाखों पात्र परिवारों को आवास नहीं मिल पाया है, जबकि इस बजट में इस योजना पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया गया।
आम आदमी पार्टी के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष देवलाल नरेटी ने कहा कि बस्तर और सरगुजा जैसे पिछड़े अंचलों को विकास के नाम पर केवल आश्वासन दिए गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इन क्षेत्रों की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए बजट में ठोस कार्ययोजना नहीं दिखती।
स्वास्थ्य क्षेत्र को लेकर उन्होंने कहा कि सरकार ने पांच नए मेडिकल कॉलेज खोलने, आयुष्मान योजना के लिए 1500 करोड़ रुपये और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के लिए 2000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था पहले से ही बेहद कमजोर है। कई मेडिकल कॉलेजों में प्रोफेसरों के पद खाली पड़े हैं। उन्होंने कहा कि डॉ. भीमराव अंबेडकर स्मृति चिकित्सालय (मेकाहारा) जैसे बड़े अस्पताल में मशीनें खराब हैं और कई जरूरी जांच नहीं हो पा रही हैं, जिससे मरीजों को निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि एनएचएम कर्मचारियों की लंबित मांगों को सरकार अब तक पूरा नहीं कर सकी है।
वहीं, आम आदमी पार्टी के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष अभिषेक मिश्रा ने कहा कि बजट में सबसे अधिक उपेक्षा किसानों की की गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि युवाओं के सशक्तिकरण के लिए 1,097 करोड़ रुपये की घोषणा के बावजूद प्रदेश में युवाओं को रोजगार नहीं मिल रहा है।
उन्होंने बीएड और डीएड अभ्यर्थियों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि पिछले तीन महीनों से वे अपनी मांगों को लेकर भूख हड़ताल पर हैं, लेकिन सरकार ने उनकी समस्याओं का समाधान करने के बजाय उन्हें जेल भेज दिया। उन्होंने कहा कि कुल मिलाकर यह बजट प्रदेश के आम नागरिक, किसान, युवा और कर्मचारियों के लिए निराशाजनक साबित हुआ है।