छत्तीसगढ़ पर्यटन को मिलेगी वैश्विक पहचान, 2028 तक नई पर्यटन पहचान बनाने का लक्ष्य: मंत्री राजेश अग्रवाल
पर्यटन, संस्कृति, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व मंत्री राजेश अग्रवाल ने रायपुर में प्रेस वार्ता के दौरान विभागों की उपलब्धियों और आगामी योजनाओं की जानकारी दी। सरकार का लक्ष्य छत्तीसगढ़ को 2028 तक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान दिलाना है। चित्रकोट, सिरपुर, भोरमदेव, मैनपाट और जशपुर जैसे स्थलों के विकास के साथ धार्मिक, सांस्कृतिक, इको-एथनिक और प्राकृतिक पर्यटन को बढ़ावा दिया जा रहा है। होमस्टे, निजी निवेश, स्थानीय रोजगार, डिजिटल पर्यटन, कलाकार कल्याण और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है।
UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l छत्तीसगढ़ को देश और दुनिया के प्रमुख पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान दिलाने की दिशा में राज्य सरकार व्यापक कार्ययोजना के साथ आगे बढ़ रही है। पर्यटन, संस्कृति, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व मंत्री राजेश अग्रवाल ने नवा रायपुर स्थित छत्तीसगढ़ संवाद के ऑडिटोरियम में आयोजित प्रेस वार्ता में विभागीय उपलब्धियों और आगामी योजनाओं की जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य वर्ष 2028 तक छत्तीसगढ़ पर्यटन की नई पहचान राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करना है।
राजेश अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ प्राकृतिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संपदाओं से समृद्ध प्रदेश है। चित्रकोट और तीरथगढ़ जैसे जलप्रपात, बस्तर और सरगुजा की जनजातीय संस्कृति, सिरपुर की ऐतिहासिक विरासत तथा मां दंतेश्वरी और मां महामाया जैसे आस्था केंद्र प्रदेश की विशिष्ट पहचान हैं। सरकार इन सभी पर्यटन एवं सांस्कृतिक स्थलों को बेहतर सुविधाओं के साथ विकसित कर देश और दुनिया के पर्यटकों तक पहुंचाने की दिशा में कार्य कर रही है।
पर्यटन क्षेत्र में निजी निवेश को बढ़ावा देने के लिए भी कई पहल की गई हैं। फिल्म सिटी निर्माण के लिए 203 करोड़ 53 लाख रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। फिल्म पर्यटन और बड़े आयोजनों को बढ़ावा देने के लिए फिल्म सिटी तथा कन्वेंशन सेंटर के विकास की दिशा में भी काम किया जा रहा है, जिसकी अनुमानित लागत करीब 350 करोड़ रुपये है।
धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए श्री रामलला अयोध्या धाम दर्शन योजना के अंतर्गत IRCTC के सहयोग से अब तक 61 ट्रेनों का संचालन किया गया है। इनके माध्यम से 50 हजार से अधिक श्रद्धालु अयोध्या और काशी की यात्रा कर चुके हैं। सरकार का उद्देश्य धार्मिक एवं आध्यात्मिक पर्यटन को प्रदेशवासियों के लिए अधिक सुगम और व्यवस्थित बनाना है।
मंत्री ने बताया कि पर्यटन का लाभ स्थानीय परिवारों और युवाओं तक पहुंचाने के लिए होमस्टे तथा स्थानीय पर्यटन अर्थव्यवस्था को बढ़ावा दिया जा रहा है। स्थानीय भोजन, हस्तशिल्प और आतिथ्य सेवाओं को पर्यटन से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं। वर्तमान में 390 से अधिक टूर ऑपरेटर एवं ट्रैवल एजेंट और 26 होटल पंजीकृत हैं। पर्यटक गाइड, आतिथ्य, फिल्म निर्माण, पर्यटन संचालन और डिजिटल कंटेंट जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षण देकर कम से कम 500 स्थानीय युवाओं को पर्यटन आधारित रोजगार से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है।
चित्रकोट को विश्वस्तरीय पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित करने की योजना पर भी काम किया जा रहा है। सिरपुर के विस्तृत पर्यटन विकास के लिए एकीकृत मास्टर प्लान तैयार किया जा रहा है। मैनपाट और जशपुर में भी पर्यटक सुविधाओं और पर्यटन अनुभव को बेहतर बनाने के प्रयास जारी हैं। धार्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए भोरमदेव कॉरिडोर के विकास हेतु 145 करोड़ 99 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई है। रतनपुर महामाया मंदिर क्षेत्र सहित अन्य महत्वपूर्ण स्थलों के विकास के प्रस्ताव भी केंद्र सरकार को भेजे गए हैं।
डिजिटल पर्यटन को विस्तार देने के लिए नई वेबसाइट और मोबाइल ऐप के माध्यम से ऑनलाइन बुकिंग, डिजिटल सूचना और पर्यटन सुविधाओं को एकीकृत किया जा रहा है। पिछले दो वर्षों में ऑनलाइन बुकिंग से करीब 6 करोड़ 48 लाख रुपये और पर्यटन इकाइयों से लगभग 31 करोड़ 75 लाख रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ है।
मंत्री ने बताया कि छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड की 18 पर्यटन संपत्तियों को लीज-सह-विकास मॉडल के माध्यम से निजी क्षेत्र की भागीदारी से विकसित करने की योजना है। इससे करीब 500 करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित होने तथा प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 500 से 1000 रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है। प्रस्तावित पर्यटन नीति 2026 में सतत विकास, निजी निवेश, समुदाय आधारित पर्यटन और स्थानीय भागीदारी को प्राथमिकता दी जाएगी।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर छत्तीसगढ़ की ब्रांडिंग के लिए इको-एथनिक, प्राकृतिक और सांस्कृतिक पर्यटन को केंद्र में रखते हुए अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मंचों में भागीदारी, फिल्म और ओटीटी आधारित प्रचार, अंतरराष्ट्रीय मीडिया आउटरीच तथा इन्फ्लुएंसर फैम टूर जैसे प्रयास प्रस्तावित हैं।
संस्कृति के क्षेत्र में कलाकारों और साहित्यकारों के कल्याण पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। कलाकार कल्याण कोष चिकित्सा अनुदान योजना के तहत पिछले ढाई वर्षों में 70 कलाकारों को करीब 30 लाख 3 हजार रुपये की सहायता दी गई है। मुख्यमंत्री लोक कलाकार प्रोत्साहन योजना के माध्यम से लोककला, लोकनाट्य, संगीत, नृत्य और छत्तीसगढ़ी भाषा के लेखन से जुड़े कलाकारों को संरक्षण एवं आर्थिक प्रोत्साहन दिया जा रहा है।
वरिष्ठ कलाकारों और साहित्यकारों के लिए संचालित मासिक वित्तीय सहायता योजना के तहत पिछले ढाई वर्षों में 407 आर्थिक रूप से अभावग्रस्त वरिष्ठ कलाकारों एवं साहित्यकारों को 82 लाख 12 हजार रुपये की पेंशन प्रदान की गई है। वहीं प्रदेश की लोक संस्कृति को नई पीढ़ी से जोड़ने के लिए बस्तर पंडुम सहित विभिन्न सांस्कृतिक आयोजनों को बढ़ावा दिया जा रहा है।
छत्तीसगढ़ की लोककलाओं, लोकगीतों, जनजातीय परंपराओं और ऐतिहासिक धरोहरों को संरक्षित करने के लिए डिजिटल आर्काइव तैयार किया जा रहा है। संस्कृति विभाग द्वारा 12 लाख पृष्ठों का डिजिटलीकरण भी किया गया है, जिन्हें वेब अभिलेखागार के माध्यम से शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों और आम नागरिकों के लिए उपलब्ध कराने की तैयारी है।
सिरपुर को विश्व धरोहर के रूप में स्थापित करने की दिशा में भी पहल जारी है। सिरपुर की बौद्ध, जैन और हिंदू स्थापत्य परंपराओं को ध्यान में रखते हुए यूनेस्को के मानकों के अनुरूप नॉमिनेशन डोजियर तैयार कर भारत सरकार को प्रस्तुत किया गया है। प्रदेश के 63 राज्य संरक्षित स्मारकों के संरक्षण पर भी कार्य किया जा रहा है।
मंत्री ने बताया कि रायपुर के महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय में नई रियासत गैलरी विकसित करने तथा वर्तमान गैलरियों के उन्नयन की योजना है। पुरखौती मुक्तांगन में लाइट एंड साउंड शो और संध्याकालीन कार्यक्रम शुरू करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ फिल्म नीति 2021 में आवश्यक संशोधन कर नई फिल्म नीति तैयार करने की प्रक्रिया चल रही है।
पुरातत्व विभाग द्वारा किए गए उत्खनन का उल्लेख करते हुए मंत्री ने बताया कि रायपुर जिले के आरंग क्षेत्र के रीवां के मृत्तिकागढ़ में लगभग 2750 वर्ष पुरानी मानव बसाहट के प्रमाण मिले हैं। इससे प्रदेश की प्राचीन ऐतिहासिक विरासत की समृद्धता सामने आती है।
राजेश अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ में पर्यटन और संस्कृति का विकास केवल नए पर्यटन स्थलों और आयोजनों तक सीमित नहीं है। इसका उद्देश्य स्थानीय रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के साथ कलाकारों के कल्याण, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और प्रदेश की पहचान को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत करना है। सरकार प्राकृतिक, सांस्कृतिक, इको-एथनिक और आध्यात्मिक पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में छत्तीसगढ़ को विकसित करने के लिए दीर्घकालिक योजना के साथ आगे बढ़ रही है।