ताराशिव गौधाम में घंटों की मशक्कत के बाद सुरक्षित हुआ बछड़े का जन्म, बचीं दो बेजुबान जिंदगियां
तिल्दा-नेवरा के ताराशिव गौधाम में प्रसव के दौरान संकट में फंसी गाय और उसके बछड़े को पशु चिकित्सकीय टीम ने घंटों की मेहनत के बाद सुरक्षित बचा लिया। ग्रामीणों ने टीम की तत्परता की सराहना करते हुए गौधाम में बेहतर सुविधाओं की मांग उठाई।
UNITED NEWS OF ASIA. अशोक मिश्रा, तिल्दा-नेवरा l तिल्दा विकासखंड की ग्राम पंचायत ताराशिव स्थित गौधाम में बुधवार रात मानवता, गौसेवा और पशु चिकित्सकीय दक्षता की प्रेरणादायक मिसाल देखने को मिली। प्रसव के दौरान एक गाय का बछड़ा पेट में बुरी तरह फंस जाने से उसकी हालत लगातार गंभीर होती जा रही थी। समय पर मिली चिकित्सकीय सहायता और कई घंटों की मेहनत के बाद गाय और उसके बछड़े दोनों की जान सुरक्षित बचा ली गई।
जानकारी के अनुसार, गौधाम में गाय के प्रसव में गंभीर जटिलता उत्पन्न होने पर सरपंच प्रतिनिधि मनीष वर्मा ने तत्काल तिल्दा पशु चिकित्सालय से संपर्क कर स्थिति की जानकारी दी। मामले की गंभीरता को देखते हुए पशुधन विकास विभाग से जुड़े चंद्रशेखर सिंह राजपूत को तत्काल मौके पर भेजा गया।
रात लगभग आठ बजे चंद्रशेखर सिंह राजपूत अपनी टीम के साथ ताराशिव गौधाम पहुंचे। यादव और वेटरिनरी डिप्लोमा धारक पलक राजपूत के सहयोग से उन्होंने कई घंटों तक लगातार प्रयास किए। कठिन परिस्थितियों के बावजूद टीम ने सफलतापूर्वक प्रसव कराया और पेट में फंसे बछड़े को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। समय पर उपचार मिलने से गाय और उसके नवजात बछड़े दोनों की जान बच गई।
पूरे रेस्क्यू अभियान के दौरान सरपंच प्रतिनिधि मनीष वर्मा स्वयं मौके पर मौजूद रहे और व्यवस्थाओं की निगरानी करते रहे। इस दौरान सुनील धुरंधर, हुमंत वर्मा, चिंटू राम साहू, सूर्यकांत भट्ट, गौसेवक यादव सहित कई ग्रामीणों ने भी सक्रिय सहयोग दिया। घटना के बाद ग्रामीणों ने चिकित्सकीय टीम की तत्परता, सेवा भावना और समर्पण की सराहना की।
चंद्रशेखर सिंह राजपूत ने बताया कि छत्तीसगढ़ सरकार की गौधाम योजना के तहत ताराशिव गौधाम की शुरुआत लगभग पांच माह पहले हुई थी, लेकिन अब भी कई आवश्यक संसाधनों और मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। उनका कहना है कि यदि गौधामों में पर्याप्त उपकरण, दवाइयां, नियमित स्टाफ और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं तो पशुओं की बेहतर देखभाल और समय पर उपचार सुनिश्चित किया जा सकता है।
वहीं मनीष वर्मा ने बताया कि गौधाम में नियमित कर्मचारियों की नियुक्ति नहीं होने से कई व्यावहारिक समस्याएं सामने आती हैं। इसके बावजूद चंद्रशेखर सिंह राजपूत समय-समय पर गौधाम पहुंचकर पशुओं का उपचार, टीकाकरण और स्वास्थ्य परीक्षण करते हैं। उन्होंने शासन से गौधाम योजना को पूरी तरह लागू करने, आवश्यक स्टाफ की नियुक्ति और संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग की।
ताराशिव गौधाम की यह घटना न केवल पशु चिकित्सकीय टीम की संवेदनशीलता और त्वरित कार्यशैली का उदाहरण है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि समय पर उपचार और सामूहिक सहयोग से बेजुबान पशुओं की अनमोल जिंदगी बचाई जा सकती है। साथ ही यह घटना गौधामों में बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की आवश्यकता की ओर भी ध्यान आकर्षित करती है।