रायपुर-बिलासपुर स्मार्ट सिटी मिशन में खर्च और अधूरे कार्यों को लेकर सवाल, RTI के आधार पर जांच की मांग

अधिवक्ता मनोज सिंह ठाकुर ने रायपुर और बिलासपुर स्मार्ट सिटी मिशन के तहत हुए खर्च, परियोजनाओं में देरी और गुणवत्ता संबंधी दस्तावेजों को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि RTI में रायपुर के लिए जारी केंद्रीय राशि के 100 प्रतिशत उपयोग की जानकारी दी गई, जबकि भौतिक प्रगति और थर्ड पार्टी क्वालिटी ऑडिट से संबंधित रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराया गया। उन्होंने सरकार से पूरे मामले की स्वतंत्र जांच और संबंधित दस्तावेज सार्वजनिक करने की मांग की है।

Sep 19, 2026 - 13:23
 0  2
रायपुर-बिलासपुर स्मार्ट सिटी मिशन में खर्च और अधूरे कार्यों को लेकर सवाल, RTI के आधार पर जांच की मांग

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l रायपुर और बिलासपुर स्मार्ट सिटी मिशन के तहत हुए खर्च, परियोजनाओं की प्रगति और गुणवत्ता संबंधी रिकॉर्ड को लेकर सवाल उठाए गए हैं। पूर्व सदस्य छत्तीसगढ़ श्रम कल्याण मंडल एवं उच्च न्यायालय के अधिवक्ता मनोज सिंह ठाकुर ने रायपुर प्रेस क्लब में पत्रकार वार्ता कर भारत सरकार के आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय से प्राप्त RTI जवाब के आधार पर कई बिंदुओं को सामने रखा। उन्होंने कहा कि मंत्रालय के 14 सितंबर 2026 के जवाब में रायपुर को जारी केंद्रीय राशि के उपयोग से संबंधित जानकारी दी गई है, जबकि परियोजनाओं की भौतिक पूर्णता और थर्ड पार्टी क्वालिटी ऑडिट से जुड़े रिकॉर्ड की उपलब्धता को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।

मनोज सिंह ठाकुर के अनुसार रायपुर के लिए जारी 453 करोड़ रुपये की केंद्रीय राशि का 100 प्रतिशत उपयोग दर्ज किया गया है। उनके द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के मुताबिक केंद्र और राज्य के हिस्से को मिलाकर रायपुर तथा बिलासपुर में कुल व्यय को लेकर करीब 1,764 करोड़ रुपये का आंकड़ा सामने आता है। हालांकि, इन आंकड़ों और परियोजनाओं की वास्तविक स्थिति के बीच अंतर की स्वतंत्र पुष्टि इस स्तर पर उपलब्ध सार्वजनिक रिकॉर्ड से नहीं हो सकी है। केंद्रीय मंत्रालय के स्मार्ट सिटी पोर्टल पर वित्तीय और परियोजना प्रगति से संबंधित अलग-अलग मॉड्यूल उपलब्ध हैं।

अधिवक्ता ने दावा किया कि RTI में सड़कों, पाइपलाइन और ड्रेनेज जैसी परियोजनाओं की भौतिक प्रगति तथा थर्ड पार्टी क्वालिटी ऑडिट से संबंधित रिकॉर्ड मांगा गया था। उनके अनुसार मंत्रालय के जवाब में ऐसे रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने की बात कही गई। उन्होंने इस स्थिति को गंभीर बताते हुए परियोजनाओं के स्वतंत्र तकनीकी परीक्षण की आवश्यकता जताई। उनके मुताबिक केवल वित्तीय उपयोग प्रमाणपत्रों के आधार पर परियोजनाओं की गुणवत्ता और वास्तविक पूर्णता का आकलन नहीं किया जा सकता।

पत्रकार वार्ता में स्मार्ट सिटी परियोजनाओं में देरी के कई उदाहरण भी रखे गए। रायपुर में शारदा चौक से तात्यापारा मार्ग चौड़ीकरण, 24x7 प्रेशराइज्ड वाटर सप्लाई और कुशालपुर-संतोषी नगर-सुंदर नगर ड्रेनेज नेटवर्क का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि निर्धारित समय-सीमा के बाद भी इन कार्यों को लेकर समस्याएं सामने आती रही हैं। बिलासपुर में मंगला STP और रिवरफ्रंट परियोजना का भी उल्लेख किया गया। वहीं, मंत्रालय की जून 2024 की आधिकारिक रिपोर्ट में बिलासपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड द्वारा अरपा नदी के किनारे रिवर व्यू रोड पर डामरीकरण कार्य पूरा किए जाने की जानकारी दी गई थी।

मनोज सिंह ठाकुर ने परियोजनाओं में देरी के बावजूद निर्माण एजेंसियों पर कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठाया। उनका दावा है कि RTI के जवाब में नोटिस या पेनाल्टी से संबंधित आंकड़ा ‘NIL’ बताया गया है। उन्होंने इसे जांच का विषय बताते हुए संबंधित अधिकारियों, परियोजना प्रबंधन एजेंसियों और निर्माण कंपनियों की भूमिका की जांच की मांग की है। इस दावे की विस्तृत स्वतंत्र पुष्टि के लिए संबंधित RTI पत्र और परियोजना-वार अनुबंध रिकॉर्ड का परीक्षण आवश्यक होगा।

उन्होंने मुख्यमंत्री, उप मुख्यमंत्री नगरीय प्रशासन और मुख्य सचिव को ज्ञापन सौंपने की जानकारी देते हुए पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की। मांगों में सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय के न्यायाधीश या सक्षम जांच एजेंसी से जांच, परियोजनाओं की थर्ड पार्टी क्वालिटी ऑडिट रिपोर्ट सार्वजनिक करना और अनुबंधीय प्रावधानों के पालन की समीक्षा शामिल है। ठाकुर ने कहा कि दस्तावेजों के आधार पर जनहित याचिका दायर करने की प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है। स्मार्ट सिटी मिशन के आधिकारिक पोर्टल पर परियोजनाओं और वित्तीय प्रगति से संबंधित जानकारी उपलब्ध है, जिसके आधार पर परियोजना-वार स्थिति की आगे जांच की जा सकती है।