सुशासन तिहार पर सियासत तेज, आप ने सरकार पर लगाया दिखावे का आरोप

आम आदमी पार्टी ने सुशासन तिहार को लेकर राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। पार्टी का आरोप है कि शिविरों में मिले हजारों आवेदन लंबित हैं और सरकार सिर्फ आंकड़ों का खेल खेल रही है।

May 1, 2026 - 20:04
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सुशासन तिहार पर सियासत तेज, आप ने सरकार पर लगाया दिखावे का आरोप

UNITED NEWS OF ASIA . अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l रायपुर में सुशासन तिहार को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष देवलाल नरेटी ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए इस अभियान को पूरी तरह दिखावा करार दिया है। उन्होंने कहा कि 1 मई से 10 जून 2026 तक प्रस्तावित सुशासन तिहार के जरिए सरकार जनता के सामने एक सकारात्मक छवि पेश करने की कोशिश कर रही है, जबकि जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है।

नरेटी ने आरोप लगाया कि पिछले साल भी सरकार ने सुशासन तिहार का आयोजन किया था और इस वर्ष अप्रैल महीने में भी प्रदेशभर में जनसमस्या निवारण शिविर लगाए गए थे। इन शिविरों में आम जनता ने बड़ी संख्या में अपनी समस्याओं से जुड़े आवेदन दिए थे, लेकिन उनमें से हजारों आवेदन आज भी लंबित हैं। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि पिछले साल कुल कितने आवेदन प्राप्त हुए और उनमें से कितनों का समाधान किया गया।

उन्होंने कहा कि सरकार ने पानी, बिजली, सड़क, राशन और पेंशन जैसी मूलभूत समस्याओं के समाधान के बड़े-बड़े दावे किए थे, लेकिन हकीकत में लोगों को राहत नहीं मिल पाई है। आम जनता शिविरों में इस उम्मीद से पहुंची थी कि उनकी समस्याओं का तत्काल समाधान होगा, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।

देवलाल नरेटी ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि यह पूरा अभियान सिर्फ प्रचार और इवेंट मैनेजमेंट तक सीमित रह गया है। उनके अनुसार सुशासन तिहार का उद्देश्य जनता को भ्रमित करना है, जबकि असल में यह केवल कागजी औपचारिकता बनकर रह गया है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार वास्तव में सुशासन चाहती है, तो उसे जनता की समस्याओं का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करना होगा।

आम आदमी पार्टी ने चेतावनी दी है कि यदि लंबित आवेदनों का जल्द निराकरण नहीं किया गया, तो पार्टी प्रदेशभर में आंदोलन करेगी। पार्टी का कहना है कि वह जनता की आवाज को सड़क से लेकर सदन तक उठाएगी और सरकार को जवाब देने के लिए मजबूर करेगी।

इस पूरे मामले में अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया देती है और लंबित समस्याओं के समाधान के लिए क्या कदम उठाती है। फिलहाल सुशासन तिहार को लेकर सियासी माहौल गर्म हो गया है और आने वाले दिनों में यह मुद्दा और जोर पकड़ सकता है।