UNITED NEWS OF ASIA. सूरजपुर l सूरजपुर जिले के जरही करोधा बस्ती में करीब 14 वर्षीय आदिवासी नाबालिग सुमन चेरवा की संदिग्ध मौत का मामला गंभीर होता जा रहा है। घटना 1 सितंबर 2026 की बताई गई है। बच्ची की मौत के बाद भटगांव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में कराए गए पोस्टमार्टम को लेकर परिजनों और आदिवासी समाज की ओर से कई सवाल उठाए जा रहे हैं। परिवार का कहना है कि पोस्टमार्टम की प्रक्रिया और रिपोर्ट को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, जिसके चलते उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच के साथ दोबारा पोस्टमार्टम कराने की मांग की है।
परिजनों की मांग है कि सुमन चेरवा की मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए। परिवार का कहना है कि पोस्टमार्टम प्रक्रिया से जुड़े सभी पहलुओं को भी जांच के दायरे में रखा जाना चाहिए, ताकि किसी तरह की शंका या भ्रम की स्थिति न रहे। मामले को लेकर आदिवासी समाज ने भी अपनी चिंता जताई है। आदिवासी समाज के जिला अध्यक्ष भानु प्रताप सिंह पोया ने दोबारा पोस्टमार्टम और निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि नाबालिग बच्ची की मौत के मामले में पूरी पारदर्शिता के साथ जांच होना जरूरी है।
पोस्टमार्टम को लेकर भटगांव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की डॉक्टर सीमा चौधरी के कथित जवाब के बाद भी सवाल उठने की बात सामने आई है। वहीं स्वास्थ्य विभाग के CHMO डॉ. के.डी. पैकरा से चर्चा के बाद भटगांव CHC प्रभारी डॉ. रतन प्रसाद मिंज को मीडिया को पोस्टमार्टम रिपोर्ट के संबंध में जानकारी देने के लिए कहा गया था। हालांकि आरोप है कि उन्होंने मीडिया के सामने बयान देने से इनकार कर दिया। इस घटनाक्रम के बाद पोस्टमार्टम और रिपोर्ट से जुड़े सवालों को लेकर चर्चाएं और तेज हो गई हैं।
इधर, मामले में जरही नायब तहसीलदार नीलिमा लकड़ा ने भी मीडिया से बातचीत की है। प्रशासनिक स्तर पर मामले से संबंधित जानकारी सामने आने के बाद अब लोगों की नजर आगे की जांच प्रक्रिया पर है। हालांकि बच्ची की मौत के वास्तविक कारण और पोस्टमार्टम रिपोर्ट से जुड़े तथ्यों को लेकर अंतिम स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
पीड़ित परिवार लगातार दोबारा पोस्टमार्टम और उच्च स्तरीय जांच की मांग कर रहा है। आदिवासी समाज की ओर से भी मांग की जा रही है कि मामले की निष्पक्षता और पारदर्शिता के साथ जांच की जाए तथा पोस्टमार्टम प्रक्रिया में यदि किसी स्तर पर कोई कमी रही हो तो उसकी भी जांच हो। समाज का कहना है कि बच्ची की मौत से जुड़े हर पहलू को सामने लाना जरूरी है।
फिलहाल सुमन चेरवा की मौत का वास्तविक कारण जांच का विषय है। परिवार और आदिवासी समाज की मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाई जाए। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और सुमन चेरवा की मौत से जुड़े सवालों का स्पष्ट जवाब कब मिल पाता है।