स्मार्ट मीटर से उपभोक्ता परेशान, बढ़े बिजली बिलों को लेकर कांग्रेस ने उठाए सवाल

छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस ने स्मार्ट मीटर के कारण उपभोक्ताओं पर बढ़ते बिजली बिलों को लेकर राज्य सरकार पर निशाना साधा है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद हजारों उपभोक्ताओं के बिजली बिल कई गुना बढ़ गए हैं। पार्टी ने स्मार्ट मीटर हटाकर सामान्य मीटर लगाने और उपभोक्ताओं को राहत देने की मांग की है।

Jul 29, 2026 - 11:47
 0  3
स्मार्ट मीटर से उपभोक्ता परेशान, बढ़े बिजली बिलों को लेकर कांग्रेस ने उठाए सवाल

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने राज्य में लगाए जा रहे स्मार्ट मीटरों को लेकर सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। पार्टी का कहना है कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं के बिजली बिलों में अप्रत्याशित बढ़ोतरी हुई है, जिससे आम नागरिक आर्थिक और मानसिक रूप से परेशान हैं। कांग्रेस ने मांग की है कि स्मार्ट मीटरों को हटाकर उनकी जगह सामान्य मीटर लगाए जाएं तथा उपभोक्ताओं को राहत प्रदान की जाए।

प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि स्मार्ट मीटर का उद्देश्य बिजली व्यवस्था को आधुनिक बनाना बताया गया था, लेकिन वास्तविकता में इससे आम लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ गया है। उनका आरोप है कि जिन उपभोक्ताओं का पहले मासिक बिजली बिल 300 से 400 रुपये के बीच आता था, उन्हें अब 2,500 से 4,000 रुपये तक के बिल भेजे जा रहे हैं। कई मामलों में हजारों और लाखों रुपये तक के बिजली बिल जारी किए जाने की शिकायतें सामने आई हैं।

कांग्रेस ने दावा किया कि रायपुर के एक उपभोक्ता को 9,03,817 रुपये का बिजली बिल जारी किया गया, जिससे लोगों में बिजली विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। पार्टी का कहना है कि ऐसे मामलों के कारण उपभोक्ता तनाव में हैं और सरकार को इस दिशा में तत्काल हस्तक्षेप करना चाहिए।

प्रेस विज्ञप्ति में यह भी कहा गया कि स्मार्ट मीटरों की टेस्टिंग के दौरान कई तकनीकी खामियां सामने आई हैं। कांग्रेस का आरोप है कि सामान्य मीटर और स्मार्ट मीटर की रीडिंग में बड़ा अंतर पाया गया है, जिससे इन मीटरों की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं। पार्टी का कहना है कि यदि तकनीकी जांच में ही अंतर सामने आ रहा है, तो उपभोक्ताओं को ऐसे मीटरों के आधार पर भारी-भरकम बिल भेजना उचित नहीं है।

धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि अधिकांश स्थानों पर स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं की सहमति के बिना लगाए गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अब बड़ी संख्या में लोग इन मीटरों का विरोध कर रहे हैं और कई जगहों पर उपभोक्ता स्वयं इन्हें हटाने की मांग कर रहे हैं। कांग्रेस ने कहा कि जब जनता स्मार्ट मीटर नहीं चाहती, तब सरकार को लोगों की भावना का सम्मान करते हुए इनकी समीक्षा करनी चाहिए।

कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां की सरकार ने स्मार्ट मीटरों से जुड़ी शिकायतों को देखते हुए उन्हें बदलने का निर्णय लिया है। पार्टी का सवाल है कि यदि दूसरे राज्यों में उपभोक्ताओं की शिकायतों को गंभीरता से लिया जा सकता है, तो छत्तीसगढ़ में ऐसा क्यों नहीं किया जा रहा।

पार्टी ने यह भी आरोप लगाया कि एक ओर राज्य सरकार विभिन्न योजनाओं के माध्यम से आर्थिक सहायता देने का दावा करती है, वहीं दूसरी ओर बढ़े हुए बिजली बिलों के जरिए लोगों पर अतिरिक्त बोझ डाल रही है। कांग्रेस का कहना है कि इससे आम परिवारों का घरेलू बजट प्रभावित हो रहा है।

प्रदेश कांग्रेस ने राज्य सरकार और बिजली विभाग से मांग की है कि स्मार्ट मीटरों की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराई जाए, बढ़े हुए बिजली बिलों की समीक्षा की जाए तथा उपभोक्ताओं के हितों को ध्यान में रखते हुए आवश्यक निर्णय लिए जाएं। साथ ही पार्टी ने स्मार्ट मीटर हटाकर सामान्य मीटर लगाने और उपभोक्ताओं को राहत देने की मांग दोहराई है।