बस्तर में मलेरिया से मौतों पर कांग्रेस का हमला, सरकार पर लापरवाही का आरोप
कांग्रेस ने बस्तर और कांकेर क्षेत्र में मलेरिया से हुई मौतों को लेकर राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी का कहना है कि स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही, हाट बाजार क्लिनिक योजना बंद होने और मच्छरदानियों के वितरण में कमी के कारण आदिवासी क्षेत्रों में फिर से मलेरिया का खतरा बढ़ गया है।
UNITED NEWS OF ASIA. छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने बस्तर संभाग में मलेरिया से हो रही मौतों और बढ़ते संक्रमण को लेकर राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता वंदना राजपूत ने जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि कांकेर जिले में पिछले 10 दिनों के भीतर तीन लोगों की मलेरिया से मौत होना बेहद चिंताजनक है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की लापरवाही के कारण बस्तर क्षेत्र में एक बार फिर मलेरिया जैसी गंभीर बीमारी का खतरा बढ़ गया है।
वंदना राजपूत ने कहा कि पिछले छह महीनों के दौरान बस्तर संभाग में मलेरिया के 26 से अधिक मामले सामने आए हैं। उनका कहना है कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में वर्ष 2018 से 2023 के बीच मलेरिया और डायरिया जैसी बीमारियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया गया था। इसके लिए विशेष अभियान चलाए गए थे, जिनका सकारात्मक परिणाम आदिवासी क्षेत्रों में देखने को मिला था।
उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में मलेरिया मुक्त अभियान केवल कागजों तक सीमित होकर रह गया है। मेडिकेटेड मच्छरदानियों का वितरण प्रभावी ढंग से नहीं हो रहा है और दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति लगातार कमजोर हुई है। कांग्रेस का दावा है कि इससे आदिवासी क्षेत्रों के लोगों का स्वास्थ्य गंभीर संकट में आ गया है।
कांग्रेस ने अपने बयान में कहा कि पूर्ववर्ती सरकार के दौरान संचालित हाट बाजार क्लिनिक योजना ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों के लोगों के लिए काफी उपयोगी साबित हुई थी। इस योजना के माध्यम से दूर-दराज के गांवों में लोगों को प्रारंभिक स्वास्थ्य जांच और उपचार की सुविधा मिलती थी। इसके अलावा मेडिकेटेड मच्छरदानियों के वितरण से मलेरिया और डायरिया जैसी बीमारियों पर काफी हद तक नियंत्रण पाया गया था।
वंदना राजपूत ने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के बजाय कई महत्वपूर्ण योजनाओं को बंद कर दिया है। उनका कहना है कि अनेक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों की कमी बनी हुई है, जिससे ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों के लोगों को समय पर उपचार नहीं मिल पा रहा है।
कांग्रेस ने यह भी कहा कि राज्य में आदिवासी मुख्यमंत्री होने के बावजूद आदिवासी अंचलों की स्वास्थ्य सुविधाओं में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है। पार्टी का आरोप है कि सरकार की प्राथमिकताओं में आदिवासी क्षेत्रों की स्वास्थ्य सुरक्षा शामिल नहीं दिखाई देती और इसका असर मलेरिया जैसी बीमारियों के बढ़ते मामलों के रूप में सामने आ रहा है।
प्रेस विज्ञप्ति में कांग्रेस ने सरकार से मांग की है कि बस्तर, कांकेर, सरगुजा, कवर्धा और जशपुर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में तत्काल विशेष स्वास्थ्य अभियान चलाया जाए। साथ ही मेडिकेटेड मच्छरदानियों का व्यापक वितरण सुनिश्चित किया जाए, स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों और आवश्यक दवाइयों की उपलब्धता बढ़ाई जाए तथा बंद की गई हाट बाजार क्लिनिक जैसी योजनाओं को पुनः शुरू किया जाए।
कांग्रेस ने कहा कि आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो मलेरिया और अन्य संक्रामक बीमारियों का खतरा और बढ़ सकता है। पार्टी ने सरकार से इस विषय पर गंभीरता से कार्य करने और प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं को तत्काल सुदृढ़ करने की मांग की है।