स्लरी पाइपलाइन हादसा: बच्चे की मौत पर नौकरी का वादा निकला झूठा, परिजनों को नौकरी के बजाय मिली धमकी
दंतेवाड़ा जिले के गीदम विकासखंड अंतर्गत हाउरनार गांव में स्लरी पाइपलाइन के गड्ढे में गिरकर बच्चे की मौत के बाद एनएमडीसी और एल एंड टी कंपनी पर गंभीर आरोप लगे हैं। पीड़ित परिवार का कहना है कि मुआवजा और पक्की नौकरी का वादा किया गया था, लेकिन अब वादे से मुकरते हुए धमकाया और गुमराह किया जा रहा है।
UNITED NEWS OF ASIA. नविन चौधरी, दंतेवाड़ा | जिले के गीदम विकासखंड अंतर्गत ग्राम हाउरनार में स्लरी पाइपलाइन के लिए खोदे गए गड्ढे में गिरकर एक मासूम बच्चे की मौत का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। इस घटना के बाद एनएमडीसी और एल एंड टी कंपनी पर पीड़ित परिवार को गुमराह करने, वादाखिलाफी करने और धमकी देने जैसे गंभीर आरोप सामने आए हैं। मृतक बच्चे की मां और परिजनों का कहना है कि हादसे के तुरंत बाद कंपनी प्रबंधन ने उन्हें मुआवजा, पक्की नौकरी और दोनों बच्चियों की शिक्षा व स्वास्थ्य की जिम्मेदारी लेने का भरोसा दिलाया था, लेकिन अब सभी वादे झूठे साबित हो रहे हैं।
पीड़ित मां ने बताया कि उनका बड़ा बेटा इस हादसे में जान गंवा बैठा। पति पहले ही उन्हें छोड़ चुका है और वह मायके में रहकर अपनी दो बेटियों का पालन-पोषण कर रही है। हादसे के बाद एनएमडीसी और एल एंड टी कंपनी के अधिकारी उनके घर पहुंचे थे और भरोसा दिलाया था कि परिवार को स्थायी नौकरी दी जाएगी, ताकि भविष्य सुरक्षित रह सके। मुआवजे के नाम पर उन्हें सिर्फ पांच लाख रुपये दिए गए, जबकि शेष मुआवजा और नौकरी अब तक नहीं मिली है।
मां का आरोप है कि जब वह नौकरी को लेकर अधिकारियों से संपर्क करती हैं, तो उनके फोन नहीं उठाए जाते और कई नंबर ब्लॉक कर दिए गए हैं। पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया कि एनएमडीसी के अधिकारी अनिमेष झा ने उनसे कहा कि “मुआवजा का पैसा वापस करोगी, तभी नौकरी मिलेगी।” इस कथन के बाद से परिवार मानसिक तनाव और भय में है।
वहीं, एनएमडीसी के स्लरी पाइपलाइन से जुड़े अधिकारी अनिमेष झा ने मीडिया से बातचीत में कहा कि इस मामले में न्यायिक जांच चल रही है और वे इससे अधिक कुछ नहीं कह सकते।
ग्रामीणों का आरोप है कि यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी कंपनी की लापरवाही के कारण कई हादसे हो चुके हैं। हाउरनार में बच्चे की मौत के अलावा भांसी में इसी तरह एक बच्चे की जान गई, गमावाड़ा में ट्रेलर ने बाइक सवार युवक को कुचल दिया और भांसी में कंपनी वाहन से बिजली तार टूटने के कारण कई घरों के इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जल गए।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि कंपनियां आदिवासी क्षेत्रों में लापरवाही बरत रही हैं और पीड़ितों को न्याय दिलाने के बजाय उन्हें नौकरी के नाम पर दफ्तरों के चक्कर कटवाए जा रहे हैं। अब सवाल यह उठता है कि क्या इस पीड़ित मां और उसके परिजनों को न्याय मिलेगा या मामला केवल आश्वासनों तक ही सीमित रह जाएगा।