सिद्ध बाबा मंदिर विवाद: फर्जी दस्तावेजों के आधार पर समिति बनाने और महिला साध्वी के अधिकार छीनने का आरोप।
मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के सिद्ध बाबा घाटी स्थित सार्वजनिक हनुमान एवं शिव मंदिर में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर समिति गठन, आय-व्यय में गड़बड़ी और महिला साध्वी के पूजा अधिकार छीने जाने के गंभीर आरोप सामने आए हैं। मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कलेक्टर जनदर्शन में की गई है।
UNITED NEWS OF ASIA. प्रदीप पाटकर, मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (MCB) | प्रसिद्ध सिद्ध बाबा घाटी (NH-43) स्थित सार्वजनिक हनुमान मंदिर और शिव मंदिर एक बार फिर विवादों के घेरे में है। जनदर्शन में सौंपे गए एक आवेदन के माध्यम से मंदिर समिति के आय-व्यय में गड़बड़ी और पूजा के अधिकारों को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
क्या है मुख्य विवाद?
आवेदन के अनुसार, मंदिर का इतिहास स्वर्गीय भैयालाल सोनी/मुरलीधर सोनी के समय उपरांत सन 8/11/1986 POR नंबर 3587/23 था जो मंदिर निर्माण के समय वन विभाग के द्वारा काटा गया था, जिन्होंने वन विभाग के नोटिस और कानूनी प्रक्रियाओं के बीच मंदिर का जीर्णोद्धार कराया था। उनके द्वारा नियुक्त साधु-संतों की परंपरा को अब कथित तौर पर "कूटरचित दस्तावेजों" (फर्जी कागजात) के जरिए खत्म करने की कोशिश की जा रही है।
आवेदन में लगाए गए प्रमुख आरोप
फर्जी समिति का गठन: आरोप है कि गोपाल चौधरी और उनके साथियों ने फर्जी दस्तावेज पेश कर 'नरहरि दास समिति' का रजिस्ट्रेशन करा लिया है।अधिकारों का हनन आवेदन में दावा किया गया है कि न्यायालय (SDM मनेंद्रगढ़) ने 14 मई 2010 को महिला साध्वी और श्याम बाबा के पक्ष में पूजा-पाठ और देखरेख का आदेश दिया था, लेकिन वर्तमान समिति द्वारा इन अधिकारों को छीना जा रहा है। वित्तीय अनियमितता शिकायतकर्ता ने मंदिर के आय-व्यय (हिसाब-किताब) की जांच करने और महिला साध्वी को पुनः उनका सेवा-पूजा का अधिकार दिलाने की मांग की है।
प्रशासनिक हस्तक्षेप की मांग
इस मामले में पहले भी राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन द्वारा ई-समाधान पोर्टल पर शिकायत (क्रमांक: 2200022023001918) दर्ज कराई गई थी। अब कलेक्टर जनदर्शन में टोकन क्रमांक 2290126000042 के माध्यम से आवेदन देकर मांग की गई है कि मामले की निष्पक्ष जांच हो ताकि "दूध का दूध और पानी का पानी" हो सके। एवं पूर्व में भी एक समिति की मांग थी किन्तु आपसी बंदरबांट एवं झोल झाल के कारण कई विवाद सामने आए हैं।
नोट: यह खबर हमारे द्वारा साझा किए गए आवेदन पत्र में लिखे तथ्यों पर आधारित है।