अयोध्या: प्रभु श्री रामलला का अलौकिक श्रृंगार, 77वें गणतंत्र दिवस पर दर्शन कर निहाल हुए भक्त
अयोध्या धाम में विराजमान प्रभु रामलला का माघ शुक्ल पक्ष अष्टमी (26 जनवरी) को दिव्य श्रृंगार किया गया। दिल्ली के फूलों और विशेष वस्त्रों से सजे प्रभु की एक झलक पाने के लिए भक्तों का तांता लगा रहा।
दिव्य दर्शन: माघ शुक्ल अष्टमी पर अलौकिक रूप में सजे प्रभु श्री रामलला
UNITED NEWS OF ASIA. अयोध्या धाम: संपूर्ण ब्रह्मांड के स्वामी, मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्री रामलला का आज 26 जनवरी (सोमवार), माघ शुक्ल पक्ष अष्टमी के पावन अवसर पर अलौकिक श्रृंगार किया गया। अयोध्या के भव्य मंदिर में विराजमान रामलला का हर दिन का श्रृंगार भक्तों को मंत्रमुग्ध कर देता है।
राजसी ठाट और विशेष श्रृंगार
प्रभु का श्रृंगार केवल एक धार्मिक विधि नहीं, बल्कि अनन्य भक्ति का प्रदर्शन है:
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दिल्ली के फूल: रामलला के लिए विशेष फूलों की माला दिल्ली से मंगाई जाती है, जो उनके दिव्य स्वरूप की शोभा बढ़ाती है।
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मौसम के अनुकूल वस्त्र: वर्तमान में जाड़े के मौसम को देखते हुए प्रभु को गर्म और ऊनी वस्त्र धारण कराए जा रहे हैं। गर्मियों में उन्हें विशेष सूती और हल्के वस्त्र पहनाए जाते हैं।
रामलला की दैनिक चर्या और आरती का समय
राम मंदिर में प्रभु की सेवा पूरी विधि-विधान से की जाती है:
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प्रातः काल: सुबह 6:30 बजे पहली आरती होती है। इससे पहले प्रभु को जगाने, लेप लगाने और स्नान कराने की प्रक्रिया पूर्ण की जाती है।
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दोपहर (भोग आरती): ठीक 12:00 बजे प्रभु को राजभोग लगाया जाता है।
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संध्या आरती: शाम 7:30 बजे भव्य संध्या आरती होती है।
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शयन: रात 8:30 बजे प्रभु को शयन कराया जाता है। भक्तों के लिए दर्शन की सुविधा शाम 7:30 बजे तक ही रहती है।
प्रभु का राजभोग: मंदिर की रसोई से खास व्यंजन
रामलला को दिन में चार बार भोग लगाया जाता है। दिन की शुरुआत 'बाल भोग' से होती है। हर समय के अनुसार अलग-अलग व्यंजन श्री राम मंदिर की अपनी पवित्र रसोई में तैयार किए जाते हैं, जो पूरी तरह शुद्ध और सात्विक होते हैं।
जय श्री राम: रामलला का यह दिव्य स्वरूप न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि करोड़ों भारतीयों की सांस्कृतिक पहचान का भी गौरव है।