छत्तीसगढ़ में ‘साड़ी विवाद’ पर मंत्री लक्ष्मी रजवाड़े का बयान, खराब साड़ी मिलने पर बदलने का आश्वासन

छत्तीसगढ़ में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को वितरित साड़ियों की गुणवत्ता को लेकर विवाद बढ़ गया है। मंत्री लक्ष्मी रजवाड़े ने कहा कि जहां खराब साड़ियां मिली हैं, वहां नई साड़ियां दी जाएंगी।

Apr 12, 2026 - 11:49
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छत्तीसगढ़ में ‘साड़ी विवाद’ पर मंत्री लक्ष्मी रजवाड़े का बयान, खराब साड़ी मिलने पर बदलने का आश्वासन

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर। छत्तीसगढ़ में इन दिनों आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को वितरित की गई साड़ियों को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा प्रदेश की लगभग 1 लाख 94 हजार आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को साड़ी वितरण किया गया था, लेकिन वितरण के बाद कई जिलों से साड़ियों की गुणवत्ता को लेकर शिकायतें सामने आई हैं। इस मुद्दे ने अब राजनीतिक रंग भी ले लिया है।

मामला बिलासपुर, दुर्ग, कबीरधाम, महासमुंद और धमतरी जैसे जिलों से सामने आया है, जहां कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि उन्हें निर्धारित मानकों के अनुरूप साड़ियां नहीं मिलीं। कई जगहों पर साड़ियों का रंग निकलने और कपड़े की गुणवत्ता खराब होने की शिकायतें भी सामने आई हैं। इन शिकायतों के बाद विपक्षी दलों, विशेष रूप से कांग्रेस ने सरकार पर निशाना साधते हुए इसे बड़ा घोटाला करार दिया है।

कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि साड़ी खरीदी में बड़े स्तर पर अनियमितताएं हुई हैं और घटिया गुणवत्ता की साड़ियां बांटकर महिलाओं के सम्मान के साथ खिलवाड़ किया गया है। उनका कहना है कि सरकार को इस मामले की निष्पक्ष जांच करानी चाहिए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।

वहीं, इस पूरे विवाद पर प्रदेश की महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी रजवाड़े ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने स्वीकार किया कि कुछ स्थानों से खराब साड़ियों की शिकायतें मिली हैं, लेकिन सरकार इस मुद्दे को गंभीरता से ले रही है। मंत्री ने स्पष्ट कहा कि जिन आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को खराब साड़ियां मिली हैं, उन्हें जल्द ही नई साड़ियां उपलब्ध कराई जाएंगी।

लक्ष्मी रजवाड़े ने अपने बयान में यह भी कहा कि उन्होंने स्वयं साड़ी को धोकर देखा है और उन्हें ऐसा नहीं लगा कि साड़ी का रंग निकल रहा है। उन्होंने कहा, “मैंने खुद अपने हाथों से साड़ी धोकर देखा है, रंग निकलने वाली बात सामने नहीं आई है।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि यदि कहीं गुणवत्ता में कमी पाई जाती है, तो संबंधित अधिकारियों के माध्यम से उसे तत्काल सुधारने के निर्देश दिए गए हैं।

मंत्री के इस बयान के बाद भी सियासी बयानबाजी जारी है। विपक्ष लगातार इस मुद्दे को उठाते हुए सरकार पर दबाव बना रहा है, जबकि सरकार की ओर से स्थिति को नियंत्रित करने और शिकायतों का समाधान करने का आश्वासन दिया जा रहा है।

यह मामला केवल साड़ियों की गुणवत्ता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के सम्मान और उनके प्रति सरकार की संवेदनशीलता से भी जुड़ा हुआ है। ऐसे में इस विवाद का जल्द समाधान होना जरूरी है, ताकि कार्यकर्ताओं का भरोसा बना रहे और योजनाओं की पारदर्शिता पर कोई सवाल न उठे।

कुल मिलाकर, ‘साड़ी विवाद’ ने छत्तीसगढ़ की राजनीति में हलचल मचा दी है और आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इस मुद्दे को किस तरह सुलझाती है और क्या विपक्ष के आरोपों की जांच होती है या नहीं।