संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय परीक्षा विवाद: बी.कॉम छात्रों को डेढ़ घंटे तक प्रश्न-पत्र के बिना बैठना पड़ा
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UNITED NEWS OF ASIA. आकाश सोनकर, अंबिकापुर | संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय के परीक्षा विभाग की गंभीर लापरवाही ने आज छात्रों के लिए एक काला अध्याय रच दिया। बी.कॉम तृतीय सेमेस्टर (Human Resource Management) की परीक्षा देने आए छात्र लगभग डेढ़ घंटे तक बिना प्रश्न-पत्र के इंतजार करते रहे। विश्वविद्यालय प्रशासन की इस चूक ने छात्रों के भविष्य पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है।
परीक्षा सुबह 9:00 बजे निर्धारित थी, लेकिन विभाग द्वारा प्रश्न-पत्र समय पर केंद्रों तक नहीं पहुँचाया गया। छात्र 10:30 बजे तक खाली मेज-कुर्सियों को ताकते हुए मानसिक तनाव में बैठे रहे। आजाद सेवा संघ के रचित मिश्रा ने इसे विभाग की सबसे शर्मनाक और गंभीर चूक करार दिया। उनका कहना है कि विभाग ने छात्रों की मेहनत और समय का कोई सम्मान नहीं किया।
विलंब के कारण छात्रों ने परीक्षा में उचित तैयारी और मानसिक एकाग्रता खो दी। रचित मिश्रा ने स्पष्ट किया कि डेढ़ घंटे के विलंब के बावजूद परीक्षा रद्द नहीं करना विश्वविद्यालय की पूरी विफलता है। उन्होंने मांग की कि दोषियों पर आर्थिक दंड और जवाबदेही तय की जाए।
ग्रामीण और दूर-दराज से आने वाले छात्रों पर इस देरी का आर्थिक और मानसिक दोनों तरह का प्रभाव पड़ा। कई छात्रों की बसें छूट गईं, जिससे उन्हें निजी वाहनों पर अतिरिक्त खर्च करना पड़ा। इसने उनकी परेशानी और बढ़ा दी।
आजाद सेवा संघ ने चेतावनी दी है कि यदि विश्वविद्यालय प्रशासन ने अपनी कार्यप्रणाली में सुधार नहीं किया और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की, तो संघ उग्र आंदोलन करने से पीछे नहीं हटेगा। संघ का कहना है कि छात्रों के समय और मेहनत के नुकसान की भरपाई होना आवश्यक है।
इस घटना ने स्पष्ट कर दिया कि परीक्षा विभाग की अक्षम कार्यप्रणाली केवल छात्रों की पढ़ाई और मानसिक स्थिति को प्रभावित नहीं करती, बल्कि विश्वविद्यालय की विश्वसनीयता पर भी गंभीर असर डालती है। ऐसे मामलों को रोकने के लिए उच्च स्तरीय जांच और जवाबदेही तय करना अनिवार्य है।
संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय की यह परीक्षा व्यवस्था में चूक न केवल छात्रों के लिए मानसिक और आर्थिक चुनौती बनी, बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र की जिम्मेदारी पर भी प्रश्नचिह्न लगाती है।