ग्रामीण उद्यमिता को नई दिशा देगा संभागीय सरस मेला, विजय शर्मा ने किया शुभारंभ

कबीरधाम के भोरमदेव मंदिर चौरा में आयोजित पांच दिवसीय संभागीय सरस मेले का शुभारंभ विजय शर्मा ने किया। मेले में स्व-सहायता समूहों की महिलाओं द्वारा तैयार जैविक खाद्य सामग्री, हस्तशिल्प, वनोपज और पारंपरिक उत्पादों की प्रदर्शनी व बिक्री की जा रही है। आयोजन का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को बाजार उपलब्ध कराना और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना है।

Aug 4, 2026 - 12:38
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ग्रामीण उद्यमिता को नई दिशा देगा संभागीय सरस मेला, विजय शर्मा ने किया शुभारंभ

UNITED NEWS OF ASIA. कबीरधाम l कबीरधाम जिले के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व वाले भोरमदेव मंदिर चौरा में आयोजित पांच दिवसीय संभागीय सरस मेले का शुभारंभ विजय शर्मा ने किया। इस अवसर पर स्व-सहायता समूहों की महिलाओं, जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों और बड़ी संख्या में ग्रामीणों की उपस्थिति रही। कार्यक्रम में ग्रामीण महिलाओं द्वारा तैयार किए गए स्वदेशी, प्राकृतिक और गुणवत्तापूर्ण उत्पादों की प्रदर्शनी एवं विक्रय की शुरुआत हुई।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विजय शर्मा ने कहा कि संभागीय सरस मेला ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक उन्नति और स्वरोजगार को बढ़ावा देने का प्रभावी माध्यम है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ से जुड़ी महिलाओं ने अपने परिश्रम और कौशल से अनेक उत्कृष्ट उत्पाद तैयार किए हैं, जिन्हें बाजार उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। ऐसे आयोजन ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के साथ-साथ महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

उन्होंने महिला स्व-सहायता समूहों की सराहना करते हुए कहा कि आज ग्रामीण महिलाएं केवल परिवार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उद्यमिता के माध्यम से आर्थिक विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। सरस मेला उनके लिए नए अवसरों का द्वार खोलने वाला मंच है।

उद्घाटन के बाद विजय शर्मा ने मेले में लगाए गए विभिन्न स्टॉलों का अवलोकन किया। उन्होंने महिलाओं से उनके उत्पादों की निर्माण प्रक्रिया और विपणन के बारे में जानकारी ली तथा विभिन्न उत्पादों की खरीदारी कर उनका उत्साहवर्धन किया। उन्होंने महिला समूहों को भविष्य में और अधिक गुणवत्तापूर्ण उत्पाद तैयार करने तथा अपने व्यवसाय का विस्तार करने के लिए प्रेरित किया।

कलेक्टर गोपाल वर्मा ने बताया कि यह सरस मेला 6 अगस्त तक चलेगा। सावन माह में आयोजित यह मेला केवल खरीदारी का अवसर नहीं बल्कि ग्रामीण उद्यमिता, महिला सशक्तिकरण और स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहित करने की महत्वपूर्ण पहल है। मेले में 50 से अधिक स्टॉल लगाए गए हैं, जहां जैविक खाद्य सामग्री, मिलेट उत्पाद, घरेलू खाद्य सामग्री, वनोपज आधारित वस्तुएं, हस्तशिल्प, हथकरघा उत्पाद, बांस और बेंत से निर्मित आकर्षक सामग्री, पारंपरिक परिधान तथा घरेलू उपयोग की अनेक वस्तुएं उपलब्ध हैं।

मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत अभिषेक अग्रवाल ने बताया कि सरस मेले का मुख्य उद्देश्य महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा तैयार उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि मेले में खरीदा गया प्रत्येक उत्पाद ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण और स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने में योगदान देगा। उन्होंने जिलेवासियों से अपील की कि बाबा भोरमदेव के दर्शन के साथ सरस मेले का भी लाभ उठाएं और स्थानीय उत्पादों की खरीदारी कर महिला समूहों का उत्साह बढ़ाएं।

कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने भी लोगों का मन मोह लिया। प्रसिद्ध पंडवानी गायिका तरुणा साहू ने अपनी प्रस्तुति से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। वहीं स्वामी आत्मानंद इंग्लिश स्कूल, बोड़ला के विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत शिव तांडव नृत्य को भी खूब सराहना मिली। इन प्रस्तुतियों ने पूरे आयोजन को सांस्कृतिक रंगों से भर दिया।

मेले में दुर्ग संभाग के कबीरधाम, दुर्ग, बालोद, राजनांदगांव, बेमेतरा, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी और खैरागढ़-छुईखदान-गंडई सहित अन्य जिलों की महिला स्व-सहायता समूहों ने अपने उत्पादों का प्रदर्शन किया है। यहां हल्दी, मिर्च, धनिया, कोदो-कुटकी, ब्लैक राइस, महुआ और आम के अचार, पापड़, अगरबत्ती, दोना-पत्तल, बैग, हस्तनिर्मित सजावटी सामग्री और अनेक उपयोगी उत्पाद आकर्षक कीमतों पर उपलब्ध हैं।

संभागीय सरस मेला न केवल ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का माध्यम बन रहा है, बल्कि स्थानीय उत्पादों को व्यापक पहचान दिलाने और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।