रायपुर के मेडिकल कॉलेज की बड़ी उपलब्धि: सिकल सेल डायग्नोस्टिक किट राष्ट्रीय मंच पर होगी प्रदर्शित

रायपुर के पं. नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय एवं अंबेडकर अस्पताल द्वारा विकसित सिकल सेल डायग्नोस्टिक किट को आईसीएमआर के प्रतिष्ठित समिट में प्रदर्शित करने के लिए चुना गया है। यह किट नवजात और गर्भावस्था के दौरान सिकल सेल एनीमिया की शीघ्र पहचान में सहायक होगी।

Apr 18, 2026 - 18:12
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रायपुर के मेडिकल कॉलेज की बड़ी उपलब्धि: सिकल सेल डायग्नोस्टिक किट राष्ट्रीय मंच पर होगी प्रदर्शित

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l  छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर स्थित पंडित जवाहर लाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय एवं डॉ. भीमराव अंबेडकर स्मृति चिकित्सालय ने चिकित्सा अनुसंधान के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। यहां की मल्टी डिसिप्लिनरी रिसर्च यूनिट (एमआरयू) द्वारा विकसित सिकल सेल डायग्नोस्टिक किट को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। इस नवाचार को इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) द्वारा आयोजित प्रतिष्ठित “इनोवेटर्स टू इंडस्ट्री कनेक्ट” समिट में प्रदर्शित करने के लिए चयनित किया गया है। यह समिट 23 अप्रैल 2026 को भारत मंडपम, नई दिल्ली में आयोजित होगा।

इस किट को एमआरयू के वैज्ञानिक डॉ. जगन्नाथ पाल, डॉ. योगिता राजपूत एवं उनकी टीम ने विकसित किया है। इसके अनुसंधान कार्य में एमआरयू की नोडल ऑफिसर डॉ. मंजुला बेक का विशेष योगदान रहा है। यह डायग्नोस्टिक किट खासतौर पर नवजात शिशुओं में सिकल सेल एनीमिया की शुरुआती पहचान और गर्भावस्था के दौरान एंटीनेटल जांच को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई है। इससे बीमारी का समय रहते पता लगाकर उपचार शुरू किया जा सकेगा, जिससे गंभीर जटिलताओं को रोका जा सकता है।

आईसीएमआर के “मेडिकल इनोवेशन पेटेंट मित्र” कार्यक्रम के अंतर्गत देशभर से चयनित शीर्ष 10 तकनीकों में इस किट को स्थान मिला है। इस सूची में आईआईटी गुवाहाटी, एम्स नई दिल्ली और टाटा मेमोरियल सेंटर जैसे प्रतिष्ठित संस्थान भी शामिल हैं। ऐसे में इस उपलब्धि को न केवल संस्थान बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ राज्य के लिए गर्व का विषय माना जा रहा है।

इस नवाचार के लिए 6 फरवरी 2026 को इंडियन पेटेंट के लिए आवेदन भी किया जा चुका है। यह परियोजना आईसीएमआर के एक्स्ट्राम्यूरल फंड से प्रायोजित थी, जिससे शोध कार्य को आवश्यक वित्तीय और तकनीकी सहयोग मिला। विशेषज्ञों का मानना है कि यह किट सिकल सेल जैसी गंभीर और अनुवांशिक बीमारी के निदान में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी, खासकर उन क्षेत्रों में जहां यह बीमारी अधिक पाई जाती है।

“इनोवेटर्स टू इंडस्ट्री कनेक्ट” समिट का उद्देश्य बायोमेडिकल इनोवेशन को उद्योग जगत से जोड़ना, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर को बढ़ावा देना और पेटेंट लाइसेंसिंग के अवसर उपलब्ध कराना है। इस मंच के माध्यम से शोधकर्ताओं को उद्योग विशेषज्ञों के साथ संवाद करने और अपनी तकनीक को व्यावसायिक रूप देने का अवसर मिलेगा।

एमआरयू रायपुर की टीम को इस किट के प्रदर्शन के लिए आधिकारिक आमंत्रण प्राप्त हुआ है। उन्हें कार्यक्रम में भाग लेने के लिए पंजीयन, तकनीक का विवरण और “मेक इन इंडिया” से संबंधित दस्तावेज निर्धारित समयसीमा में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही, टीम को अपनी विकसित किट के साथ कार्यक्रम में उपस्थित रहने के लिए कहा गया है।

इस उपलब्धि पर मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. विवेक चौधरी ने कहा कि संस्थान में शोध और नवाचार को लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिसके सकारात्मक परिणाम अब राष्ट्रीय स्तर पर दिखने लगे हैं। वहीं, अस्पताल के अधीक्षक डॉ. संतोष सोनकर ने इसे राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं के लिए एक महत्वपूर्ण कदम बताया।

यह उपलब्धि न केवल छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय है, बल्कि देश में बायोमेडिकल अनुसंधान और नवाचार को नई दिशा देने वाली पहल के रूप में भी देखी जा रही है।