रायपुर में आज निकलेगा इमाम हुसैन के चालीसवें का मातमी जुलूस, करबला तालाब तक रहेगा आयोजन

रायपुर के मोमिनपारा स्थित हैदरी मस्जिद ट्रस्ट द्वारा 4 अगस्त को हज़रत इमाम हुसैन के चालीसवें के अवसर पर मातमी जुलूस निकाला जाएगा। जुलूस मोमिनपारा से शुरू होकर शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए ऐतिहासिक करबला तालाब पहुंचेगा।

Aug 4, 2026 - 14:53
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रायपुर में आज निकलेगा इमाम हुसैन के चालीसवें का मातमी जुलूस, करबला तालाब तक रहेगा आयोजन

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l रायपुर में हज़रत इमाम हुसैन के चालीसवें (चेहलुम) के अवसर पर 4 अगस्त को पारंपरिक मातमी जुलूस निकाला जाएगा। इस धार्मिक आयोजन का आयोजन हैदरी मस्जिद ट्रस्ट, मोमिनपारा द्वारा किया जा रहा है। जुलूस में बड़ी संख्या में अकीदतमंद शामिल होकर इमाम हुसैन और करबला के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे।

हैदरी मस्जिद ट्रस्ट के अनुसार मातमी जुलूस मंगलवार दोपहर 2:30 बजे मोमिनपारा से प्रारंभ होगा। इसके बाद जुलूस हांडीपारा, आज़ाद चौक, आमापारा, विवेकानंद आश्रम, राजकुमार कॉलेज और जी.ई. रोड सहित शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए देर रात ऐतिहासिक करबला तालाब पहुंचेगा, जहां इसका समापन होगा।

आयोजकों ने बताया कि जुलूस में बड़ी संख्या में अलम-ए-मुबारक और ताज़िए शामिल होंगे। पारंपरिक मातम और धार्मिक अनुष्ठानों के माध्यम से करबला के शहीदों की कुर्बानी को याद किया जाएगा। चेहलुम इस्लामी परंपरा में एक महत्वपूर्ण अवसर माना जाता है, जिसमें इमाम हुसैन और उनके साथियों के बलिदान को श्रद्धापूर्वक स्मरण किया जाता है।

आयोजन समिति ने बताया कि हर वर्ष की तरह इस बार भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। जुलूस के दौरान अनुशासन और शांतिपूर्ण वातावरण बनाए रखने की अपील की गई है। आयोजन की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और विभिन्न स्थानों पर स्वयंसेवकों की तैनाती भी की गई है, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

मातमी जुलूस के शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरने के कारण कई स्थानों पर यातायात व्यवस्था में अस्थायी बदलाव होने की संभावना है। ऐसे में आम नागरिकों से अपील की गई है कि वे निर्धारित वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करें और यातायात पुलिस के निर्देशों का पालन करें। सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए प्रशासन भी आवश्यक प्रबंध करेगा।

चेहलुम का यह आयोजन केवल धार्मिक परंपरा का निर्वहन नहीं, बल्कि करबला के संदेश—सत्य, न्याय, मानवता और त्याग—को याद करने का अवसर भी है। हर वर्ष बड़ी संख्या में लोग इस जुलूस में शामिल होकर इमाम हुसैन की कुर्बानी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। आयोजकों ने सभी अकीदतमंदों से शांतिपूर्ण और अनुशासित ढंग से जुलूस में शामिल होने तथा सामाजिक सौहार्द और भाईचारे की भावना को मजबूत बनाने की अपील की है।