पुलिस की मजबूत विवेचना से बड़ा फैसला, सगे भाई की हत्या का आरोपी आजीवन कारावास से दंडित

रायगढ़ जिले के जूटमिल थाना क्षेत्र अंतर्गत तरकेला गांव में होली की रात सगे भाई की हत्या के मामले में न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाया है। पुलिस की सटीक और मजबूत विवेचना के आधार पर आरोपी सुनील कुमार दास को आजीवन कारावास की सजा दी गई। यह उप निरीक्षक गिरधारी साव की विवेचना से लगातार पांचवां गंभीर मामला है, जिसमें दोषी को कठोर दंड मिला।

Jan 18, 2026 - 16:42
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पुलिस की मजबूत विवेचना से बड़ा फैसला, सगे भाई की हत्या का आरोपी आजीवन कारावास से दंडित

 UNITED NEWS OF ASIA. महेंद्र अग्रवाल, रायगढ़। रायगढ़ पुलिस को गंभीर अपराधों में दोषियों को सजा दिलाने की दिशा में एक और बड़ी सफलता मिली है। पुलिस अधीक्षक  दिव्यांग कुमार पटेल के मार्गदर्शन में की गई सशक्त विवेचना के परिणामस्वरूप जूटमिल थाना क्षेत्र के बहुचर्चित हत्या प्रकरण में आरोपी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। यह मामला होली पर्व की रात हुए एक पारिवारिक विवाद का है, जिसने खौफनाक रूप लेकर हत्या का रूप ले लिया।

दिनांक 16 जनवरी 2026 को माननीय सत्र न्यायाधीश जितेन्द्र कुमार जैन, रायगढ़ ने आरोपी सुनील कुमार दास पिता पंचराम महंत (28 वर्ष), निवासी तरकेला जूटमिल को अपने सगे छोटे भाई निर्मल दास की हत्या का दोषी ठहराया। न्यायालय ने आरोपी को आजीवन कारावास तथा ₹50 के अर्थदंड से दंडित किया। इस प्रकरण की विवेचना तत्कालीन जूटमिल थाना में पदस्थ उप निरीक्षक गिरधारी साव द्वारा की गई, जबकि अभियोजन की ओर से लोक अभियोजक  पी.एन. गुप्ता ने प्रभावी पैरवी की।

प्रकरण के अनुसार 14 मार्च 2025 को होली की रात करीब 8 बजे आरोपी सुनील दास और उसके छोटे भाई निर्मल दास के बीच घरेलू विवाद हुआ। परिजनों द्वारा समझाने के प्रयास किए गए, लेकिन आरोपी ने आपा खोते हुए लकड़ी के डंडे से सिर, हाथ और पैरों पर गंभीर हमला कर दिया। हमले में निर्मल दास की मौके पर ही मौत हो गई।

घटना के बाद मृतक के पिता पंचराम महंत की रिपोर्ट पर थाना जूटमिल में मर्ग कायम कर शव पंचनामा व पोस्टमार्टम कराया गया। बाद में अपराध क्रमांक 75/2025 धारा 103(1) भारतीय न्याय संहिता 2023 के तहत प्रकरण दर्ज किया गया।

विवेचना अधिकारी उप निरीक्षक गिरधारी साव ने घटनास्थल निरीक्षण, भौतिक साक्ष्य, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, परिस्थितिजन्य साक्ष्य एवं गवाहों के बयान को वैज्ञानिक तरीके से संकलित किया। न्यायालय में अभियोजन पक्ष द्वारा 14 गवाह प्रस्तुत किए गए, जिनके आधार पर आरोपी का अपराध संदेह से परे सिद्ध हुआ।

मामले की सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि आरोपी को बचाने के प्रयास में पिता द्वारा मिथ्या बयान दिया गया, जिस पर न्यायालय ने उनके विरुद्ध विधिक कार्रवाई के निर्देश दिए। यह फैसला न केवल न्याय की जीत है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि रायगढ़ पुलिस की पेशेवर विवेचना से अपराधियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।