पांडातराई महाविद्यालय में “प्रश्नों की समझ” पर ज्ञानवर्धक कार्यशाला आयोजित

अटल बिहारी वाजपेयी शासकीय महाविद्यालय पांडातराई में हिन्दी विभाग द्वारा “प्रश्नों की समझ” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई, जिसमें विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को उत्तर लेखन की महत्वपूर्ण तकनीकों से अवगत कराया।

Apr 13, 2026 - 17:07
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पांडातराई महाविद्यालय में “प्रश्नों की समझ” पर ज्ञानवर्धक कार्यशाला आयोजित

UNITED NEWS OF ASIA. सौरभ नामदेव, कवर्धा l जिला कबीरधाम के अटल बिहारी वाजपेयी शासकीय महाविद्यालय पांडातराई में हिन्दी विभाग द्वारा एक दिवसीय ज्ञानवर्धक कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। यह कार्यशाला आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (आईक्यूएसी) के तत्वावधान में आयोजित की गई, जिसका मुख्य विषय “प्रश्नों की समझ” रहा। यह विषय विद्यार्थियों के शैक्षणिक विकास और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रासंगिक माना जाता है।

कार्यक्रम में विषय विशेषज्ञ के रूप में डॉ. लाला प्रसाद शर्मा, प्राध्यापक हिन्दी, बद्री प्रसाद लोधी स्नातकोत्तर शासकीय महाविद्यालय, आरंग (रायपुर) उपस्थित रहे। उन्होंने अपने प्रभावशाली और सरल उद्बोधन के माध्यम से विद्यार्थियों को परीक्षा में सफलता के महत्वपूर्ण पहलुओं से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि केवल विषय का ज्ञान होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि प्रश्नों को सही ढंग से समझना और उसी अनुरूप उत्तर प्रस्तुत करना भी उतना ही आवश्यक है।

डॉ. शर्मा ने विद्यार्थियों को प्रश्नपत्रों में प्रयुक्त विभिन्न निर्देशात्मक शब्दों की गहराई से जानकारी दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि “वर्णन करें”, “लेख लिखें”, “निबंध लिखें”, “व्याख्या करें”, “प्रकाश डालें”, “उल्लेख करें”, “विवेचना करें”, “टिप्पणी करें”, “विश्लेषण करें”, “आलोचना करें”, “समालोचना करें”, “समीक्षा करें” और “मूल्यांकन करें” जैसे शब्दों का अर्थ एक समान नहीं होता। प्रत्येक शब्द की अपनी अलग विशेषता, उद्देश्य और उत्तर लेखन की शैली होती है।

उदाहरणों के माध्यम से उन्होंने समझाया कि “वर्णन” में तथ्यात्मक जानकारी दी जाती है, जबकि “विश्लेषण” में विषय के कारण और परिणामों की गहराई से चर्चा की जाती है। “आलोचना” में किसी विषय के गुण-दोषों का संतुलित विवेचन किया जाता है, वहीं “मूल्यांकन” में अंतिम निष्कर्ष प्रस्तुत किया जाता है। इस प्रकार की स्पष्ट व्याख्या से विद्यार्थियों को प्रश्नों को समझने और सटीक उत्तर लिखने की दिशा में महत्वपूर्ण मार्गदर्शन प्राप्त हुआ।

कार्यशाला के दौरान आयोजन समिति के संयोजक डॉ. द्वारिका प्रसाद कन्द्रवंशी, सह-संयोजक अतिथि व्याख्याता बुद्धदेव सहित डॉ. राजकुमार वर्मा, सूचीगन सिंह धुर्वे, अजय कुमार, जागेश्वर वर्मा, डॉ. गजानंद साहू, कामता प्रसाद वन्तुवंशी, डॉ. गोविन्द सिंह ठाकुर एवं अजय कुमार शर्मा की गरिमामयी उपस्थिति रही। सभी ने विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन करते हुए उन्हें सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम के संरक्षक एवं महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. लखन कुमार तिवारी ने अपने प्रेरणादायी संबोधन में कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल परीक्षा पास करना नहीं, बल्कि विषय की गहन समझ विकसित करना है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएं विद्यार्थियों में आत्मविश्वास बढ़ाती हैं और उन्हें प्रतिस्पर्धात्मक वातावरण के लिए तैयार करती हैं।

कार्यशाला के दौरान विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और विषय विशेषज्ञ से अपने प्रश्न पूछकर शंकाओं का समाधान प्राप्त किया। संवादात्मक शैली में आयोजित इस सत्र ने विद्यार्थियों को न केवल प्रश्नों की बारीकियों को समझने में मदद की, बल्कि उन्हें प्रभावी उत्तर लेखन की तकनीकों से भी परिचित कराया।

इस सफल आयोजन ने यह साबित कर दिया कि यदि विद्यार्थियों को सही दिशा और मार्गदर्शन मिले, तो वे अपनी शैक्षणिक यात्रा में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकते हैं।