निरंतर अध्ययन से सेवा तक: एनीमिया जागरूकता की मिसाल बने डॉ. अश्विनी कुमार द्विवेदी
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UNITED NEWS OF ASIA. हसिब अख्तर, रायपुर | नए वर्ष का आरंभ आत्ममंथन और प्रेरणा का समय होता है। ऐसे समय में कुछ व्यक्तित्व अपने सतत अध्ययन, शोध और सेवा-भाव से समाज के लिए आदर्श बनकर सामने आते हैं। चिकित्सा क्षेत्र में ऐसा ही एक प्रेरणादायी नाम है डॉ. अश्विनी कुमार द्विवेदी, जिन्होंने एनीमिया (रक्ताल्पता) जैसी गंभीर और व्यापक समस्या के विरुद्ध जागरूकता फैलाने का बीड़ा उठाया है।
डॉ. द्विवेदी का मानना है कि चिकित्सा केवल रोग का उपचार नहीं, बल्कि ज्ञान, संवेदना और निरंतर अध्ययन की साधना है। इसी दर्शन के साथ वे स्वयं को नवीन शोधों और अंतरराष्ट्रीय चिकित्सा साहित्य से लगातार जोड़ते रहते हैं। एनीमिया और रक्त विकारों से संबंधित देश-विदेश की अनेक महत्वपूर्ण पुस्तकों और शोध आलेखों का अध्ययन कर उन्होंने न केवल अकादमिक योगदान दिया, बल्कि व्यावहारिक स्तर पर भी रोगियों को लाभ पहुँचाया।
अक्टूबर माह में लंदन में आयोजित एक प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय मेडिकल कॉन्फ्रेंस में डॉ. द्विवेदी ने भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए दुर्लभ रोग हिमैटोहाइड्रोसिस (खूनी पसीना) पर आधारित एक सफल केस प्रेजेंट किया। यह प्रस्तुति अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों द्वारा सराही गई और भारतीय चिकित्सा जगत के लिए गौरव का विषय बनी। इसी विषय पर आधारित उनकी पुस्तक ने वैश्विक चिकित्सा साहित्य में महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त किया है।
एनीमिया पर केंद्रित उनकी प्रमुख संदर्भ पुस्तकों में “Anemia: From Awareness to Action”, “Clinical Perspectives in Hematological Disorders” और “Hematohidrosis: A Rare Clinical Enigma” उल्लेखनीय हैं। इन पुस्तकों से प्राप्त ज्ञान को उन्होंने भारतीय सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप ढालकर जन-स्वास्थ्य अभियानों में सफलतापूर्वक लागू किया।
शैक्षणिक और प्रशासनिक क्षेत्र में भी डॉ. द्विवेदी की भूमिका उल्लेखनीय है। वे केंद्रीय होम्योपैथी अनुसंधान परिषद (CCRH) के सदस्य तथा देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर की एक्जीक्यूटिव काउंसिल के सदस्य के रूप में शोध, नवाचार और स्वास्थ्य विस्तार गतिविधियों को सक्रिय रूप से आगे बढ़ा रहे हैं।
डॉ. अश्विनी कुमार द्विवेदी का जीवन यह सशक्त संदेश देता है कि जो चिकित्सक सीखना नहीं छोड़ता, वही समाज का सच्चा मार्गदर्शक बनता है। उनका कार्य न केवल चिकित्सा जगत, बल्कि युवाओं और समाज के लिए भी प्रेरणास्रोत है।