एक कदम गांव की ओर, ग्राम सभा सशक्तिकरण की ओर: राष्ट्रीय पेसा दिवस पर नगरी ब्लॉक में कार्यशाला सह प्रशिक्षण शिविर आयोजित
राष्ट्रीय पेसा दिवस के अवसर पर नगरी ब्लॉक के अभ्यारण्य क्षेत्र अंतर्गत ग्राम मासुलखोई और रिसगांव में पेसा कानून को लेकर कार्यशाला सह प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया गया। शिविर में पेसा अधिनियम, वन अधिकार कानून और ग्राम सभा सशक्तिकरण पर विस्तार से प्रशिक्षण दिया गया।
UNITED NEWS OF ASIA. रिजवान मेमन,धमतरी | नगरी ब्लॉक। “एक कदम गांव की ओर, ग्राम सभा सशक्तिकरण की ओर” के संकल्प के साथ राष्ट्रीय पेसा दिवस के अवसर पर नगरी विकासखंड अंतर्गत अभ्यारण्य क्षेत्र के ग्राम मासुलखोई एवं रिसगांव में पेसा कानून को लेकर एक कार्यशाला सह प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर का उद्देश्य ग्राम सभाओं को उनके संवैधानिक अधिकारों, कर्तव्यों और स्वशासन की अवधारणा से सशक्त करना रहा।
कार्यशाला में पेसा कानून, वन अधिकार मान्यता अधिनियम, संवैधानिक अधिकार, सामुदायिक वन संसाधन अधिकार तथा इनके प्रबंधन के नियमों पर विस्तारपूर्वक चर्चा की गई। प्रशिक्षकों द्वारा बताया गया कि पेसा कानून की मूल भावना ग्राम सभा को सर्वोच्च निर्णयकारी संस्था के रूप में स्थापित करना है, ताकि आदिवासी और ग्रामीण समुदाय अपने जल, जंगल, जमीन, संस्कृति एवं संसाधनों पर स्वयं निर्णय ले सकें।
प्रशिक्षण के दौरान यह भी बताया गया कि पेसा अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन से ग्राम स्तर पर स्वशासन को मजबूती मिलती है और बाहरी हस्तक्षेप पर नियंत्रण संभव होता है। ग्राम सभा की भूमिका केवल औपचारिक बैठक तक सीमित न रहकर विकास योजनाओं, संसाधन प्रबंधन और सामाजिक न्याय में निर्णायक होनी चाहिए।
शिविर में शिक्षा को बढ़ावा देने और क्षेत्र के युवाओं को जागरूक कर नेतृत्व की जिम्मेदारी सौंपने पर विशेष जोर दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि जब तक युवा पेसा कानून और अपने अधिकारों को नहीं समझेंगे, तब तक ग्राम सभा की वास्तविक शक्ति सामने नहीं आ सकेगी।
इस अवसर पर प्रमुख प्रशिक्षकों में मनोज साक्षी, मुकेश मंडावी और घासीराम नेताम शामिल रहे। साथ ही थाना प्रभारी खल्लारी की उपस्थिति ने कार्यक्रम को प्रशासनिक समर्थन प्रदान किया।
कार्यक्रम में उदंती-सीतानदी फेडरेशन ग्राम सभा अध्यक्ष ईश्वरी लाल नेताम, सरपंच बिरबल पदमाकर (करही), चन्द्र कुमार अग्रवानी (रिसगांव), शलेन्द्री नेताम (फरसगांव), मोतिम बाई नेताम (खल्लारी), राधिका नेताम (जनपद सदस्य) सहित अनेक ग्राम पंचायत प्रतिनिधि एवं सामाजिक संगठन के पदाधिकारी उपस्थित रहे।
इसके अलावा गोंडवाना समाज, हल्बा समाज, केंवट समाज, राऊत समाज सहित विभिन्न सामाजिक संगठनों के ग्रामीण अध्यक्षों की सक्रिय सहभागिता रही।
कार्यशाला के समापन पर यह संकल्प लिया गया कि ग्राम सभाओं को सशक्त बनाकर पेसा कानून की भावना को जमीनी स्तर पर लागू किया जाएगा, ताकि गांव आत्मनिर्भर और स्वशासित बन सकें।