मलेरिया पीड़ित महिला का उपचार करा कर महिला प्रधान आरक्षक ने दिया मानवता का परिचय
नारायणपुर जिले के छोटेडोंगर थाना क्षेत्र में तैनात महिला प्रधान आरक्षक सुमति दुग्गा ने मलेरिया व टाइफाइड से पीड़ित एक गरीब महिला का अपने खर्च से इलाज कराकर मानवता की मिसाल पेश की। यह घटना नक्सल प्रभावित क्षेत्र में पुलिस के जनसरोकार की भावना को दर्शाती है।
UNITED NEWS OF ASIA. संतोष मजुमदार,नारायणपुर / छोटेडोंगर। नक्सल मोर्चे पर तैनात सुरक्षा बल जहां एक ओर नक्सलियों से लगातार मुकाबला कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर वे जनसरोकार से जुड़े मानवीय कार्यों के माध्यम से आम जनता का भरोसा भी जीत रहे हैं। ऐसा ही एक सराहनीय उदाहरण नारायणपुर जिले के छोटेडोंगर थाना क्षेत्र के ग्राम बेचा में देखने को मिला, जहां एक महिला प्रधान आरक्षक ने मानवता की मिसाल पेश की।
जानकारी के अनुसार, गुरुवार को छोटेडोंगर थाना से जिला पुलिस बल की टीम ग्राम बेचा, कड़ेमेटा और किलम क्षेत्र में गश्त एवं सर्चिंग पर निकली हुई थी। इस दौरान पुलिस टीम ने ग्राम बेचा में ग्रामीणों से मुलाकात कर गांव की स्थिति और नक्सल गतिविधियों के संबंध में जानकारी ली। इसी दौरान ग्रामीणों ने बताया कि गांव के ऊपर पारा में रहने वाली करीना कोर्राम नामक महिला पिछले एक सप्ताह से मलेरिया और टाइफाइड से पीड़ित है।
बताया गया कि बीमारी के कारण महिला की हालत अत्यंत कमजोर हो गई थी। साथ ही उसकी आर्थिक स्थिति भी बेहद खराब थी, जिससे वह अपना इलाज कराने में असमर्थ थी। महिला की दयनीय स्थिति को देखते हुए छोटेडोंगर थाना में पदस्थ महिला प्रधान आरक्षक सुमति दुग्गा ने तत्काल मानवीय पहल करते हुए पीड़ित महिला को छोटेडोंगर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया।
हालांकि, स्वास्थ्य केंद्र में मलेरिया की आवश्यक दवाइयां उपलब्ध नहीं थीं। डॉक्टरों ने दवाइयां बाहर से खरीदने की सलाह दी। इस पर महिला प्रधान आरक्षक सुमति दुग्गा ने बिना किसी देरी के अपने निजी खर्च से करीब 1500 रुपये की मलेरिया की दवाइयां मेडिकल स्टोर से खरीदकर महिला का उपचार शुरू कराया।
समय पर उपचार मिलने से महिला की स्थिति में सुधार हुआ और उसकी जान बच सकी। इस मानवीय कार्य से ग्रामीणों में पुलिस के प्रति विश्वास और सम्मान की भावना और अधिक मजबूत हुई।
महिला प्रधान आरक्षक सुमति दुग्गा द्वारा किया गया यह कार्य यह साबित करता है कि पुलिस केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि जरूरतमंदों की सहायता कर समाज में मानवता, संवेदना और सेवा भाव का भी परिचय देती है। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में इस तरह के कार्य पुलिस और आम जनता के बीच सेतु का काम कर रहे हैं।