मोरवा की ‘सुर ओ चंदम म्यूजिक अकाडमी’ बनी संगीत शिक्षा का केंद्र, 10 दिन में हारमोनियम-तबला सीखने का मौका
सिंगरौली के मोरवा में स्थित ‘सुर ओ चंदम म्यूजिक अकाडमी’ संगीत प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र बन रही है। यहां 10 दिनों में हारमोनियम और तबला की शुरुआती ट्रेनिंग के साथ गायन, नृत्य और डिप्लोमा कोर्स की सुविधाएं उपलब्ध हैं।
UNITED NEWS OF ASIA. आदर्श तिवारी, सिंगरौली l सिंगरौली जिले के मोरवा क्षेत्र में स्थित ‘सुर ओ चंदम म्यूजिक अकाडमी’ इन दिनों संगीत शिक्षा के क्षेत्र में एक मजबूत पहचान बना रही है। यह संस्थान स्थानीय युवाओं और बच्चों को संगीत की बारीकियों से परिचित कराने के साथ-साथ उन्हें एक बेहतर मंच भी प्रदान कर रहा है। कम समय में गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण देने की वजह से यह अकादमी तेजी से लोकप्रिय हो रही है।
इस अकादमी को निखिल भारत संगीत समिति से मान्यता प्राप्त है, जो इसकी विश्वसनीयता और गुणवत्ता को दर्शाता है। यहां गायन (वोकल) और वादन (इंस्ट्रुमेंटल) के साथ-साथ शास्त्रीय नृत्य जैसे कथक और भरतनाट्यम की भी ट्रेनिंग दी जाती है। इससे विद्यार्थियों को एक ही स्थान पर विभिन्न कला विधाओं को सीखने का अवसर मिलता है।
अकादमी के संचालक बी. दास के अनुसार, यहां विद्यार्थियों को मात्र 10 दिनों में हारमोनियम और तबला की शुरुआती शिक्षा दी जाती है। इस कोर्स में छात्रों को सुर, ताल, लय और रियाज की मूलभूत जानकारी दी जाती है, जिससे वे संगीत की नींव मजबूत कर सकें। यह सुविधा खासकर उन लोगों के लिए लाभकारी है, जो कम समय में संगीत सीखना चाहते हैं।
‘सुर ओ चंदम म्यूजिक अकाडमी’ पिछले 20 वर्षों से निरंतर संचालित हो रही है। इस दौरान यहां से प्रशिक्षित कई विद्यार्थी आज संगीत के क्षेत्र में अपना करियर बना चुके हैं। कई छात्र-छात्राएं शिक्षक बनकर दूसरों को संगीत की शिक्षा दे रहे हैं, जो इस संस्थान की सफलता और प्रभाव को दर्शाता है।
अकादमी में डिप्लोमा कोर्स की सुविधा भी उपलब्ध है, जिसमें प्रैक्टिकल और थ्योरी दोनों प्रकार की कक्षाएं आयोजित की जाती हैं। विद्यार्थियों को नियमित अभ्यास, परीक्षा और मंच प्रदर्शन के जरिए प्रशिक्षित किया जाता है। इससे उनका आत्मविश्वास बढ़ता है और वे पेशेवर स्तर पर आगे बढ़ने के लिए तैयार होते हैं।
यहां अनुशासन और नियमितता पर विशेष जोर दिया जाता है। बच्चों से लेकर युवाओं तक सभी आयु वर्ग के लोग यहां प्रशिक्षण प्राप्त कर सकते हैं। साथ ही, समय-समय पर सांस्कृतिक कार्यक्रम और प्रतियोगिताओं का आयोजन भी किया जाता है, जिससे छात्रों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलता है।
मोरवा जैसे क्षेत्र में इस तरह की संगीत अकादमी का होना स्थानीय प्रतिभाओं के लिए एक बड़ा अवसर है। पहले जहां संगीत सीखने के लिए बड़े शहरों पर निर्भर रहना पड़ता था, वहीं अब यह सुविधा स्थानीय स्तर पर ही उपलब्ध है। इससे न केवल समय और खर्च की बचत होती है, बल्कि क्षेत्र के सांस्कृतिक विकास को भी बढ़ावा मिलता है।
कुल मिलाकर, ‘सुर ओ चंदम म्यूजिक अकाडमी’ सिंगरौली जिले में संगीत और कला शिक्षा को नई दिशा देने का काम कर रही है और आने वाले समय में यह और अधिक युवाओं को प्रेरित करने का माध्यम बन सकती है।