राज्यपाल पुरस्कार की चयन प्रक्रिया पर उठे सवाल, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी में शिक्षा विभाग पर लगे गंभीर आरोप

शिक्षक दिवस के अवसर पर दिए जाने वाले राज्यपाल पुरस्कारों की चयन प्रक्रिया को लेकर मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले में सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि कुछ वर्षों से एक ही संस्था और आपसी संबंधों से जुड़े शिक्षकों के नाम बार-बार पुरस्कार के लिए सामने आ रहे हैं। विभागीय अधिकारियों से चयन प्रक्रिया और पात्रता को लेकर स्पष्टीकरण की मांग की गई है।

Sep 5, 2026 - 07:57
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राज्यपाल पुरस्कार की चयन प्रक्रिया पर उठे सवाल, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी में शिक्षा विभाग पर लगे गंभीर आरोप

UNITED NEWS OF ASIA. जावेद शेख, मानपुर l मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले में शिक्षक दिवस के अवसर पर दिए जाने वाले राज्यपाल पुरस्कारों की चयन प्रक्रिया को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। आरोप लगाए जा रहे हैं कि उत्कृष्ट शैक्षणिक योगदान, नवाचार, विद्यार्थियों की उपलब्धियों और लंबे समय की सेवा जैसे मानकों के बजाय कथित नजदीकी और संबंधों का प्रभाव चयन प्रक्रिया में दिखाई दे रहा है। शिक्षक दिवस पर संभावित पुरस्कार प्राप्तकर्ताओं की सूची सामने आने के बाद शिक्षा जगत में इसको लेकर चर्चा तेज हो गई है।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार जिले के गठन के बाद अंबागढ़ चौकी विकासखंड के सिरलगढ़ प्राथमिक शाला में पदस्थ सहायक शिक्षक नीलकंठ कोमरे और अंगद सलामे को राज्यपाल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। इसके बाद संजय देवांगन और संध्या साहू का नाम भी पुरस्कार प्राप्त करने वाले शिक्षकों में सामने आया। अब 5 सितंबर 2026 को शिक्षक दिवस के अवसर पर सिरलगढ़ प्राथमिक शाला में पदस्थ योगेन्द्र देवांगन और नवाटोला प्राथमिक शाला के प्रधान पाठक भजन लाल साहू के नाम संभावित पुरस्कार प्राप्तकर्ताओं के रूप में सामने आने का दावा किया गया है।

इसी क्रम को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं कि आखिर एक ही संस्था से जुड़े शिक्षकों के नाम लगातार जिला और राज्य स्तर के शिक्षक सम्मान के लिए क्यों सामने आ रहे हैं। आरोप लगाने वालों का कहना है कि जिले के मोहला और मानपुर विकासखंडों में भी बड़ी संख्या में शिक्षक बेहतर कार्य कर रहे हैं, ऐसे में चयन प्रक्रिया में सभी विकासखंडों और विद्यालयों के शिक्षकों को समान अवसर मिलना चाहिए।

मामले में योगेन्द्र देवांगन की पात्रता को लेकर भी सवाल उठाया गया है। दावा है कि वे सिरलगढ़ प्राथमिक शाला में लगभग दो वर्षों से पदस्थ हैं और इससे यह सवाल उठ रहा है कि राज्यपाल पुरस्कार जैसे प्रतिष्ठित सम्मान के लिए उनके कार्यों का किस आधार पर मूल्यांकन किया गया। सवाल यह भी है कि क्या उनकी पूर्व पदस्थापना के दौरान किए गए कार्यों, विद्यार्थियों के शैक्षणिक परिणाम, नवाचार और विद्यालय की उपलब्धियों को चयन समिति ने विस्तृत रूप से देखा है।

भजन लाल साहू को लेकर भी आरोपों में संबंधों और पदस्थापना से जुड़े समीकरणों का उल्लेख किया गया है। वहीं पिछले वर्ष पुरस्कार प्राप्त करने वाले संजय देवांगन को योगेन्द्र देवांगन का करीबी रिश्तेदार बताए जाने की बात भी सामने आई है। हालांकि इन संबंधों और चयन प्रक्रिया में इनके प्रभाव को लेकर कोई स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं है। ऐसे में विभागीय स्तर पर स्पष्ट जानकारी सामने आना जरूरी माना जा रहा है।

शिक्षा विभाग की चयन प्रक्रिया को लेकर यह भी सवाल उठाया गया है कि यदि पुरस्कार के लिए निर्धारित मापदंडों के आधार पर शिक्षकों का चयन हुआ है तो संबंधित मूल्यांकन और चयन प्रक्रिया की जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं की जाती। राज्यपाल पुरस्कार को शिक्षकों की मेहनत और योगदान की मान्यता माना जाता है, इसलिए चयन में पारदर्शिता को महत्वपूर्ण बताया जा रहा है।

इस मामले में जिला शिक्षा अधिकारी योगदास साहू का पक्ष भी सामने आया है। उन्होंने फोन पर बातचीत में विभागीय स्तर पर बेहद बड़ी गलती होने की बात स्वीकार किए जाने का दावा किया गया है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि राज्यपाल के हाथों पुरस्कृत किए जाने वाले शिक्षकों के चयन के समय उनकी इस जिले में पदस्थापना नहीं हुई थी। अब पूरे मामले में विभाग की ओर से विस्तृत स्पष्टीकरण और चयन प्रक्रिया की जानकारी सामने आने का इंतजार है।