रायगढ़ में वन तस्करी के बड़े अंतरराज्यीय सिंडिकेट का खुलासा, तीन आरोपी गिरफ्तार; फर्जी परमिट से लकड़ी खपाने का आरोप

रायगढ़ पुलिस और वन विभाग ने खैर व तेंदू लकड़ी की कथित अवैध कटाई, भंडारण और अंतरराज्यीय तस्करी से जुड़े एक बड़े सिंडिकेट का खुलासा किया है। पुलिस के अनुसार मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेजा गया है, जबकि एक आरोपी फरार है। गढ़उमरिया स्थित गोदाम से बड़ी मात्रा में लकड़ी और अन्य सामान जब्त किया गया था।

Sep 5, 2026 - 08:02
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रायगढ़ में वन तस्करी के बड़े अंतरराज्यीय सिंडिकेट का खुलासा, तीन आरोपी गिरफ्तार; फर्जी परमिट से लकड़ी खपाने का आरोप

UNITED NEWS OF ASIA. महेंद्र अग्रवाल, रायगढ़ l जिले में खैर और तेंदू प्रजाति की लकड़ियों की कथित अवैध कटाई, भंडारण और अंतरराज्यीय तस्करी से जुड़े बड़े नेटवर्क का पुलिस और वन विभाग ने खुलासा किया है। 4 सितंबर 2026 को पुलिस कंट्रोल रूम में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में अधिकारियों ने कार्रवाई की जानकारी साझा की। पुलिस के अनुसार इस मामले में तीन मुख्य आरोपियों रोहित मित्तल, मनीष अग्रवाल और सलाउद्दीन खान को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेजा गया है, जबकि वाहन मालिक बताए जा रहे भरत कुमार मेश्राम की तलाश जारी है।

पुलिस और वन विभाग के मुताबिक यह नेटवर्क छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़, घरघोड़ा और तमनार वन क्षेत्रों से लकड़ियों की कथित अवैध कटाई कराकर उनका गढ़उमरिया स्थित एक गोदाम में भंडारण करता था। आरोप है कि ग्रामीणों को पैसों का लालच देकर लकड़ी कटवाई जाती थी और इसके बाद लकड़ियों को दूसरे राज्यों में भेजकर अधिक कीमत पर खपाया जाता था। जांच में ओडिशा, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश से लेकर हरियाणा, हिमाचल प्रदेश तथा अन्य राज्यों तक कारोबार से जुड़े होने की बात सामने आने का दावा किया गया है।

मामले की शुरुआत पिछले वर्ष मई में वन विभाग को मिली सूचना से हुई थी। सूचना के आधार पर 5 मई 2025 को वन विभाग की टीम ने जामटीकरा गढ़उमरिया स्थित एक गोदाम में कार्रवाई की थी। विभाग के अनुसार वहां एक ट्रक में 42 नग तेंदू प्रजाति के लट्ठे लदे मिले, जिनका कुल आयतन 1.731 घन मीटर बताया गया। इसके अलावा गोदाम से तेंदू और खैर प्रजाति के 146 लट्ठे, कुल 6.741 घन मीटर, नौ चट्टे जलाऊ लकड़ी, एक कटर मशीन, एक वजन मशीन, दो कुल्हाड़ी और एक हथौड़ा जब्त किया गया था।

वन विभाग की कार्रवाई के दौरान लकड़ियों के परिवहन से संबंधित ट्रांसपोर्ट परमिट भी प्रस्तुत किए गए थे। विभाग की जांच में संबंधित परमिट पर जारीकर्ता वन परिक्षेत्र अधिकारी के हस्ताक्षर नहीं पाए गए, जिसके बाद दस्तावेजों के फर्जी होने की आशंका जताई गई। इसके बाद मामले की विस्तृत जांच के लिए वन विभाग की ओर से 2 सितंबर 2026 को जूटमिल थाने में आवेदन दिया गया। पुलिस ने अपराध क्रमांक 490/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता और भारतीय वन अधिनियम की संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह के निर्देशन में नगर पुलिस अधीक्षक मयंक मिश्रा के नेतृत्व में विशेष टीम गठित की गई। पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान रोहित मित्तल द्वारा गोदाम किराये पर लेने और मनीष अग्रवाल के साथ मिलकर लकड़ियों की छिलाई तथा भंडारण कराने की जानकारी सामने आई। इसके बाद परिवहन से जुड़े लोगों के माध्यम से लकड़ियों को दूसरे राज्यों में भेजे जाने की भूमिका की भी जांच की गई।

पुलिस के अनुसार जांच में पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद रोहित मित्तल, मनीष अग्रवाल और सलाउद्दीन खान को गिरफ्तार किया गया और न्यायिक रिमांड पर भेजा गया। भरत कुमार मेश्राम फरार बताया गया है। पूरे मामले में पुलिस और वन विभाग की संयुक्त जांच जारी है। अधिकारियों का कहना है कि जांच आगे बढ़ने के साथ लकड़ी तस्करी के नेटवर्क से जुड़े अन्य तथ्यों और लोगों की भूमिका भी स्पष्ट हो सकती है।