नगर निगम में ‘टेंडर सेटिंग’ के आरोप: विकास कार्यों की रफ्तार पर उठे सवाल

एमसीबी नगर निगम में टेंडर प्रक्रिया को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। शहर की बुनियादी समस्याओं के बीच फाइलों में देरी, कथित दबाव और पारदर्शिता की कमी को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन स्थानीय स्तर पर चर्चा तेज है।

Apr 25, 2026 - 11:42
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नगर निगम में ‘टेंडर सेटिंग’ के आरोप: विकास कार्यों की रफ्तार पर उठे सवाल

UNITED NEWS OF ASIA. प्रदीप पाटकर, कोरिया l एमसीबी नगर निगम इन दिनों विभिन्न आरोपों और चर्चाओं के केंद्र में है। शहर में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति को लेकर जनता पहले से ही परेशान है, वहीं अब टेंडर प्रक्रिया और विकास कार्यों की गति को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा है कि निगम के भीतर कार्यप्रणाली में पारदर्शिता की कमी है और कई प्रक्रियाएं अपेक्षित गति से नहीं चल पा रही हैं।

शहर की सड़कों की हालत, जल निकासी और अन्य मूलभूत सुविधाओं को लेकर नागरिकों की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। इसके बावजूद विकास कार्यों में अपेक्षित तेजी नहीं दिख रही है। कुछ स्थानीय सूत्रों का दावा है कि निगम के भीतर फाइलों की प्रक्रिया धीमी है और कई बार निर्णय लेने में अनावश्यक देरी होती है।

बताया जा रहा है कि कुछ मामलों में टेंडर प्रक्रिया को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि कुछ कार्यों में प्रतिस्पर्धा और पारदर्शिता के सिद्धांतों का पूरी तरह पालन नहीं हो पा रहा है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इस तरह की चर्चाओं ने प्रशासनिक कार्यशैली को लेकर संदेह पैदा कर दिया है।

निगम के इंजीनियरिंग विभाग पर भी अप्रत्यक्ष दबाव की बातें सामने आ रही हैं। कुछ लोगों का कहना है कि तकनीकी निर्णयों में बाहरी प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है, जिससे कार्यों की गुणवत्ता और समयसीमा प्रभावित हो सकती है। वहीं ठेकेदारी व्यवस्था को लेकर भी यह आरोप लगाए जा रहे हैं कि वास्तविक कार्य करने वाले और टेंडर लेने वाले के बीच अंतर देखा जा रहा है।

फाइलों की धीमी गति भी एक बड़ा मुद्दा बनकर सामने आई है। कई मामलों में यह कहा जा रहा है कि एक फाइल को स्वीकृति मिलने में काफी समय लग रहा है, जिससे विकास कार्यों में देरी हो रही है। इससे न केवल परियोजनाओं की लागत प्रभावित हो सकती है, बल्कि आम जनता को भी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।

हालांकि इन सभी आरोपों पर नगर निगम या संबंधित अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में यह आवश्यक हो जाता है कि यदि इस तरह की शिकायतें सामने आ रही हैं, तो उनकी निष्पक्ष जांच की जाए और पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।

विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी शहरी निकाय की सफलता उसके प्रशासनिक ढांचे की पारदर्शिता और जवाबदेही पर निर्भर करती है। यदि टेंडर प्रक्रिया और विकास कार्यों में पारदर्शिता बनी रहती है, तो न केवल कार्यों की गुणवत्ता बेहतर होती है बल्कि जनता का विश्वास भी मजबूत होता है।

फिलहाल, एमसीबी नगर निगम से जुड़ी ये चर्चाएं स्थानीय स्तर पर एक अहम मुद्दा बन गई हैं। आने वाले समय में प्रशासन की ओर से इस पर क्या कदम उठाए जाते हैं, यह देखना महत्वपूर्ण होगा। जनता की अपेक्षा है कि विकास कार्यों में तेजी आए और पारदर्शी व्यवस्था के जरिए शहर की समस्याओं का समाधान किया जाए।