वनों पर 'मौन' पहरा, धड़ल्ले से लूटी जा रही खनिज और वन संपदा
अवैध कटाई एवं खनिज चोरी पर वन विभाग मनेंद्रगढ़ के डीएफओ की कार्यशैली पर सवाल अभी तक नहीं जान पाए क्या अधिकारी की कौन कटाई कर रहा है।
UNITED NEWS OF ASIA. महेंद्र शुक्ला, मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर। जिले के वन क्षेत्रों में इन दिनों 'रक्षक ही भक्षक' वाली कहावत चरितार्थ होती दिख रही है। एक ओर जहाँ जंगलों को बचाने की जिम्मेदारी वन विभाग के कंधों पर है, वहीं दूसरी ओर अधिकारियों की रहस्यमयी चुप्पी के बीच खनिज संपदा और बेशकीमती लकड़ियों की बेखौफ चोरी जारी है।
इन क्षेत्रों में मची है लूट:
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, जिले के कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में माफिया सक्रिय हैं। विशेषकर निम्नलिखित क्षेत्रों में अवैध गतिविधियों का ग्राफ तेजी से बढ़ा है अमृतधारा और हसदेव क्षेत्र जलप्रपात के आसपास के वन क्षेत्रों में पेड़ों की कटाई।लाई, नागपुर और महाराज इन इलाकों में खनिज संपदा का अवैध दोहन साथ ही धड़ल्ले से कटाई को अंजाम दिया जा रहा।उजियारपुर, बरबसपुर, राधारमण नगर और सोनवर्षा यहाँ से लगातार अवैध परिवहन की शिकायतें मिल रही हैं।
मूकदर्शक बना प्रशासन
हैरानी की बात यह है कि इन क्षेत्रों में दिन-दहाड़े खनिज संपदा से लदे वाहन और कटी हुई लकड़ियां पार की जा रही हैं, लेकिन संबंधित क्षेत्र के वन अधिकारी और मैदानी अमला मौन साधे बैठा है। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि बिना मिलीभगत के इतने बड़े पैमाने पर अवैध उत्खनन और कटाई संभव नहीं है।
बड़ा सवाल क्या वन विभाग के आला अधिकारी इन गतिविधियों से अनजान हैं, या जानबूझकर अपनी आँखें मूंद रखी हैं? जंगलों की इस दुर्दशा का खामियाजा आने वाली पीढ़ियों को भुगतना पड़ेगा।
प्रमुख बिंदु:
पर्यावरण को खतरा: हसदेव और अमृतधारा जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में कटाई से पारिस्थितिकी तंत्र बिगड़ रहा है।
राजस्व की हानि: खनिज चोरी से शासन को लाखों रुपये के राजस्व का चूना लग रहा है।
जांच की दरकार: ग्रामीणों ने उच्चाधिकारियों से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है।