महासमुंद शिक्षा विभाग में डाइस कोड मर्ज पर सवाल, भीम आर्मी ने स्कूलों का किया निरीक्षण

महासमुंद जिले के नयापारा अछरीडीह में दो अलग-अलग संचालित स्कूलों का डाइस कोड मर्ज किए जाने को लेकर सवाल उठे हैं। भीम आर्मी के पदाधिकारियों ने स्कूलों का निरीक्षण कर बच्चों की उपस्थिति में अंतर का दावा किया। संगठन ने शिक्षा विभाग से मामले की जांच और दोनों स्कूलों को अलग-अलग दर्ज करने की मांग की है। पंचायत क्षेत्र की समस्याओं पर भी ग्रामीणों से चर्चा की गई।

Aug 17, 2026 - 12:34
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महासमुंद शिक्षा विभाग में डाइस कोड मर्ज पर सवाल, भीम आर्मी ने स्कूलों का किया निरीक्षण

UNITED NEWS OF ASIA. शिखा दास, महासमुंद l जिले के ग्राम नयापारा अछरीडीह में संचालित प्राथमिक स्कूलों के डाइस कोड मर्ज किए जाने के मामले को लेकर सवाल खड़े हुए हैं। भीम आर्मी भारत एकता मिशन महासमुंद के पदाधिकारियों ने रविवार को गांव पहुंचकर स्कूलों का निरीक्षण किया। संगठन का दावा है कि कागजी रिकॉर्ड में दोनों स्कूलों को एक कर दिया गया है, जबकि जमीनी स्तर पर दोनों स्थानों पर स्कूल अलग-अलग संचालित हो रहे हैं।

मामले की शिकायत मिलने के बाद भीम आर्मी के जिला अध्यक्ष द्वारिका कुर्रे, जिला प्रवक्ता वीरेंद्र पात्रे सहित अन्य पदाधिकारी नयापारा अछरीडीह पहुंचे। टीम ने स्कूल संचालन, विद्यार्थियों की संख्या और उपलब्ध व्यवस्थाओं की जानकारी लेने के साथ मौके की स्थिति का जायजा लिया।

स्कूलों की स्थिति को लेकर उठे सवाल

निरीक्षण के दौरान भीम आर्मी पदाधिकारियों ने बच्चों की उपस्थिति में बड़ा अंतर होने का दावा किया। संगठन के अनुसार, एक स्थान पर 94 बच्चों की उपस्थिति दर्ज बताई गई, जबकि दूसरे स्थान पर केवल 16 बच्चे मौजूद मिले। संगठन का कहना है कि दोनों स्कूलों की भौगोलिक स्थिति अलग है और वहां विद्यार्थियों की संख्या भी अलग-अलग है।

इसी आधार पर भीम आर्मी ने सवाल उठाया कि यदि दोनों स्थानों पर स्कूल अलग-अलग संचालित हो रहे हैं और विद्यार्थियों की संख्या एवं परिस्थितियां अलग हैं, तो शिक्षा विभाग द्वारा दोनों स्कूलों का डाइस कोड किस आधार पर मर्ज किया गया।

डाइस कोड यानी UDISE+ से संबंधित स्कूल पहचान व्यवस्था के तहत स्कूलों की जानकारी दर्ज की जाती है। इसमें विद्यार्थियों, शिक्षकों, आधारभूत सुविधाओं और अन्य शैक्षणिक विवरणों से संबंधित आंकड़े शामिल होते हैं। ऐसे में किसी स्कूल की जानकारी को दूसरे स्कूल के साथ मर्ज किए जाने से रिकॉर्ड और सुविधाओं के आवंटन पर असर पड़ने की आशंका को लेकर संगठन ने जांच की मांग की है।

शिक्षा व्यवस्था और सुविधाओं पर असर की आशंका

भीम आर्मी के जिला अध्यक्ष द्वारिका कुर्रे ने आरोप लगाया कि दोनों स्कूलों की अलग-अलग भौगोलिक स्थिति और विद्यार्थियों की संख्या के बावजूद डाइस कोड मर्ज किया जाना उचित नहीं है। उनका कहना है कि स्कूलों के रिकॉर्ड में इस तरह का बदलाव होने से शिक्षकों की पदस्थापना, मध्यान्ह भोजन, पाठ्यपुस्तकों तथा अन्य शैक्षणिक सुविधाओं के आवंटन में भ्रम या गड़बड़ी की स्थिति बन सकती है।

कुर्रे ने कहा कि बच्चों की शिक्षा और उन्हें मिलने वाली सरकारी सुविधाओं से जुड़े रिकॉर्ड में पारदर्शिता जरूरी है। उनका कहना है कि विभाग को मौके की वास्तविक स्थिति और सरकारी रिकॉर्ड का मिलान कर यह स्पष्ट करना चाहिए कि दोनों स्कूलों की स्थिति क्या है और डाइस कोड मर्ज करने का निर्णय किन परिस्थितियों में लिया गया।

हालांकि, डाइस कोड मर्ज करने के निर्णय के पीछे शिक्षा विभाग का आधिकारिक पक्ष अभी सामने नहीं आया है। मामले में विभागीय रिकॉर्ड और संबंधित आदेशों की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि दोनों स्कूलों को एक रिकॉर्ड में दर्ज करने का आधार क्या था।

पंचायत क्षेत्र की समस्याओं पर भी चर्चा

स्कूल निरीक्षण के बाद भीम आर्मी की टीम ने ग्राम पंचायत अछरीडीह नयापारा में ग्रामीणों से मुलाकात की। इस दौरान ग्रामीणों से गांव की मूलभूत समस्याओं और लंबे समय से लंबित विकास कार्यों की जानकारी ली गई।

जिला अध्यक्ष द्वारिका कुर्रे ने सरपंच के साथ बैठक कर जनहित से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की। ग्रामीणों ने गांव में रुके हुए विकास कार्यों और मूलभूत सुविधाओं से संबंधित समस्याएं टीम के सामने रखीं।

बैठक में ग्रामीणों की समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर उठाने तथा पंचायत क्षेत्र में लंबित विकास कार्यों को गति देने को लेकर चर्चा हुई। भीम आर्मी पदाधिकारियों ने कहा कि शिक्षा के साथ-साथ गांवों में सड़क, पानी, स्वच्छता और अन्य मूलभूत सुविधाओं से जुड़े विषयों पर भी संबंधित अधिकारियों का ध्यान आकर्षित किया जाएगा।

दोनों स्कूलों को अलग-अलग दर्ज करने की मांग

निरीक्षण के बाद भीम आर्मी ने शिक्षा विभाग से नयापारा और अछरीडीह में संचालित स्कूलों की वास्तविक स्थिति की जांच करने की मांग की है। संगठन का कहना है कि यदि दोनों स्कूल वास्तव में अलग-अलग स्थानों पर संचालित हो रहे हैं, तो उनके रिकॉर्ड और डाइस कोड को भी वास्तविक स्थिति के अनुरूप अलग-अलग दर्ज किया जाना चाहिए।

संगठन ने शिक्षा विभाग से डाइस कोड मर्ज करने के निर्णय की समीक्षा करने, संबंधित दस्तावेजों की जांच करने और विद्यार्थियों को मिलने वाली सुविधाओं को सुनिश्चित करने की मांग की है।

भीम आर्मी का कहना है कि स्कूलों से जुड़े रिकॉर्ड में किसी भी प्रकार की विसंगति होने पर उसका सीधा प्रभाव विद्यार्थियों और शैक्षणिक व्यवस्था पर पड़ सकता है। इसलिए मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति सार्वजनिक किए जाने की आवश्यकता है।

DEO से संपर्क का प्रयास

मामले में शिक्षा विभाग का पक्ष जानने के लिए जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन संपर्क नहीं हो सका। विभाग का आधिकारिक पक्ष मिलने के बाद ही डाइस कोड मर्ज किए जाने के कारण और प्रक्रिया की स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।

फिलहाल मामला भीम आर्मी द्वारा किए गए निरीक्षण और उपलब्ध जानकारी के आधार पर उठाए गए सवालों तक सीमित है। डाइस कोड मर्ज करने का निर्णय नियमों के अनुरूप था या नहीं, विद्यार्थियों की संख्या से संबंधित रिकॉर्ड क्या है और दोनों स्कूलों की प्रशासनिक स्थिति क्या है, इन सभी बिंदुओं की पुष्टि शिक्षा विभाग के आधिकारिक रिकॉर्ड और जांच के बाद ही हो सकेगी।