महासमुंद ब्रेकिंग: चौथी कक्षा की परीक्षा में विवादित प्रश्न, जिला शिक्षा अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी
महासमुंद जिले में छमाही परीक्षा के दौरान चौथी कक्षा के इंग्लिश प्रश्न पत्र में पूछे गए एक विवादित सवाल को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया। धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के आरोप के बाद संचालक लोक शिक्षण ने जिला शिक्षा अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
UNITED NEWS OF ASIA. जगदीश पटेल,सरायपाली | महासमुंद जिले से एक बड़ी और संवेदनशील खबर सामने आई है। छमाही परीक्षा के दौरान चौथी कक्षा के इंग्लिश प्रश्न पत्र में पूछे गए एक विवादित सवाल को लेकर जिले में बवाल मच गया। मामले ने तूल तब पकड़ा जब प्रश्न पत्र में कुत्ते के नाम से जुड़ा एक सवाल सामने आया, जिसमें भगवान राम का नाम विकल्प के रूप में शामिल किया गया था।
दरअसल, इंग्लिश पेपर में एक प्रश्न पूछा गया था— “मोना के कुत्ते का क्या नाम है?”। इस सवाल के चार विकल्पों में भगवान राम का नाम भी दिया गया था। जैसे ही यह प्रश्न सामने आया, हिंदू संगठनों ने इसका कड़ा विरोध किया और इसे धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला बताया। संगठनों का कहना था कि भगवान राम जैसे पूज्य देवता का नाम इस प्रकार के प्रश्न में शामिल करना पूरी तरह अनुचित है।
विवाद बढ़ने के बाद हिंदू संगठनों ने जिला शिक्षा अधिकारी के खिलाफ प्रदर्शन किया और उनका पुतला तक दहन किया। मामला इतना गंभीर हो गया कि शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों को इसमें हस्तक्षेप करना पड़ा। पूरे घटनाक्रम के बाद अब इस मामले में बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई सामने आई है।
संचालक लोक शिक्षण संचालन ने इस प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए महासमुंद जिला शिक्षा अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। नोटिस में पूछा गया है कि इस तरह का प्रश्न पत्र कैसे तैयार हुआ और इसकी जांच-पड़ताल क्यों नहीं की गई। साथ ही यह भी स्पष्ट करने को कहा गया है कि इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार कौन है।
शिक्षा विभाग के सूत्रों के अनुसार, यदि जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया तो आगे कड़ी कार्रवाई भी की जा सकती है। वहीं, इस पूरे मामले के बाद शिक्षा विभाग ने भविष्य में प्रश्न पत्र निर्माण प्रक्रिया को और अधिक सतर्कता से करने के निर्देश दिए हैं।
इस घटना ने एक बार फिर शिक्षा व्यवस्था में लापरवाही और संवेदनशीलता की कमी को उजागर कर दिया है। फिलहाल पूरे जिले की नजरें जिला शिक्षा अधिकारी के जवाब और विभागीय कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।