जनपद पंचायत मगरलोड में बड़ा वित्तीय घोटाला, डाटा एंट्री ऑपरेटर ने 8.52 लाख रुपये का किया गबन
धमतरी जिले के नगरी विकासखंड अंतर्गत जनपद पंचायत मगरलोड में एक बड़ा वित्तीय घोटाला सामने आया है। यहां पदस्थ डाटा एंट्री ऑपरेटर ने शासकीय चेक चोरी कर फर्जी हस्ताक्षर के जरिए 8.52 लाख रुपये का गबन किया। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया है।
UNITED NEWS OF ASIA.रिजवान मेमन, धमतरी | जिले के नगरी विकासखंड अंतर्गत जनपद पंचायत मगरलोड में एक गंभीर वित्तीय घोटाले का मामला उजागर हुआ है। इस मामले में पंचायत कार्यालय में पदस्थ डाटा एंट्री ऑपरेटर द्वारा शासकीय राशि के गबन की शिकायत सामने आने के बाद प्रशासन और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है।
जनपद पंचायत मगरलोड की मुख्य कार्यपालन अधिकारी सुश्री दिव्या ठाकुर द्वारा थाना मगरलोड में लिखित आवेदन प्रस्तुत कर रिपोर्ट दर्ज कराई गई। आवेदन में बताया गया कि जनपद पंचायत कार्यालय में कार्यरत डाटा एंट्री ऑपरेटर धमेन्द्र साहू ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए गंभीर वित्तीय अनियमितता और धोखाधड़ी को अंजाम दिया है।
रिपोर्ट के अनुसार आरोपी ने जनपद पंचायत कार्यालय के कुल 06 शासकीय चेक चोरी किए। इन चेकों पर मुख्य कार्यपालन अधिकारी के फर्जी हस्ताक्षर कर 8,52,795 रुपये की राशि को अपने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया एवं एक्सिस बैंक के खातों में स्थानांतरित किया। इसके बाद आरोपी ने उक्त राशि का स्वयं के उपयोग में लिया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए थाना मगरलोड में अपराध पंजीबद्ध कर पुलिस द्वारा तत्काल जांच शुरू की गई। जांच के दौरान घटनास्थल का निरीक्षण किया गया तथा प्रार्थी एवं संबंधित गवाहों के कथन दर्ज किए गए। इसके साथ ही बैंक ऑफ बड़ौदा की भैसमुंडी एवं मेघा शाखाओं से लेन-देन से संबंधित दस्तावेज प्राप्त किए गए।
RTGS के माध्यम से किए गए ट्रांजेक्शन हेतु आरोपी द्वारा प्रस्तुत फर्जी हस्ताक्षरयुक्त पत्रों की भी बारीकी से जांच की गई। पुलिस ने आरोपी के एसबीआई खाते की बैंक ट्रांजेक्शन डिटेल खंगाली, जिसमें यह स्पष्ट हुआ कि आरोपी द्वारा लगभग 8,22,795 रुपये का फर्जीवाड़ा किया गया है।
साक्ष्यों के आधार पर आरोपी धमेन्द्र साहू को विधिवत गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है। फिलहाल पुलिस मामले की विस्तृत जांच में जुटी हुई है और यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस घोटाले में किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता तो नहीं है।
यह मामला पंचायत स्तर पर वित्तीय पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।