लू और भीषण गर्मी से बचाव के लिए आयुष विभाग की एडवाइजरी, अपनाएं आसान प्राकृतिक उपाय
बेमेतरा जिला चिकित्सालय के आयुष विभाग ने बढ़ती गर्मी और लू के खतरे को देखते हुए आम जनता के लिए एडवाइजरी जारी की है। इसमें प्राकृतिक, आयुर्वेदिक उपायों, खानपान और दिनचर्या में बदलाव के जरिए हीट स्ट्रोक से बचाव के उपाय बताए गए हैं।
UNITED NEWS OF ASIA. अरुण पुरेना, बेमेतरा l बेमेतरा जिले में लगातार बढ़ते तापमान और लू के प्रभाव को देखते हुए जिला चिकित्सालय बेमेतरा स्थित आयुष विभाग द्वारा आम नागरिकों के लिए एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य एडवाइजरी जारी की गई है। इस एडवाइजरी में प्राकृतिक और आयुर्वेदिक उपायों के माध्यम से गर्मी से बचाव और शरीर को स्वस्थ रखने के तरीके बताए गए हैं।
गौरतलब है कि जिला चिकित्सालय में आयुष विभाग का एनसीडी क्लिनिक अक्टूबर 2024 से संचालित हो रहा है, जहां अब तक लगभग सात हजार से अधिक मरीज लाभान्वित हो चुके हैं। इस क्लिनिक में आयुष चिकित्सक डॉ. चिरंजीवी वर्मा (एमडी), योग एवं प्राकृतिक चिकित्सक डॉ. भूमिका साहू तथा काउंसलर गोविंद सिंह नियमित रूप से अपनी सेवाएं दे रहे हैं। यह सुविधा कलेक्टर प्रतिष्ठा ममगाई के निर्देश, सीएमएचओ डॉ. अमृत लाल रोहलेडर के मार्गदर्शन एवं सिविल सर्जन डॉ. लोकेश साहू के नेतृत्व में सफलतापूर्वक संचालित हो रही है।
आयुष विभाग के अनुसार, गर्मी के मौसम में थोड़ी सी लापरवाही भी हीट स्ट्रोक का कारण बन सकती है। हालांकि, सही दिनचर्या और खानपान अपनाकर इससे बचा जा सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि गर्मी में शरीर को हाइड्रेट रखना बेहद जरूरी है। इसके लिए तरबूज, खरबूज, खीरा और ककड़ी जैसे पानी से भरपूर फलों का सेवन करना चाहिए। साथ ही नारियल पानी, छाछ और सत्तू जैसे पेय पदार्थ शरीर को ऊर्जा देने के साथ ठंडक भी प्रदान करते हैं।
नींबू पानी और जौ का पानी भी शरीर को अंदर से ठंडा रखने में मददगार होते हैं। वहीं, लौकी, तोरई और परवल जैसी हरी सब्जियां हल्की और सुपाच्य होती हैं, जो गर्मी में पाचन तंत्र को बेहतर बनाए रखती हैं। दूसरी ओर, तला-भुना और अत्यधिक मसालेदार भोजन शरीर की गर्मी बढ़ा सकता है, इसलिए इससे दूरी बनाना जरूरी है। अधिक चाय, कॉफी और कोल्ड ड्रिंक का सेवन भी डिहाइड्रेशन का कारण बन सकता है।
घर पर अपनाए जाने वाले सरल उपायों में दिन में एक से दो बार ठंडे पानी से स्नान करना, पैरों को ठंडे पानी में 10–15 मिनट तक रखना तथा मिट्टी का लेप पेट और आंखों पर लगाना शामिल है, जिससे शरीर को तुरंत ठंडक मिलती है।
आयुर्वेद के अनुसार, गर्मी के मौसम में शरीर में “पित्त” दोष बढ़ जाता है, जिसे संतुलित रखना आवश्यक है। इसके लिए धनिया, सौंफ और जीरा उबालकर उसका पानी पीना लाभकारी होता है। गुलकंद, बेल का शरबत और आम पन्ना भी शरीर को ठंडा रखने में सहायक हैं।
योग और प्राणायाम को भी प्राकृतिक कूलिंग सिस्टम माना गया है। शीतली, शीतकारी और चंद्र भेदन प्राणायाम शरीर की गर्मी को कम करने में प्रभावी हैं। साथ ही सुबह के समय हल्का योग और ध्यान मानसिक शांति के साथ शारीरिक संतुलन बनाए रखते हैं।
हीट स्ट्रोक के लक्षणों में तेज बुखार, चक्कर आना, सिरदर्द, उल्टी, त्वचा का लाल और सूखा होना तथा बेहोशी शामिल हैं। ऐसी स्थिति में प्रभावित व्यक्ति को तुरंत ठंडी जगह पर ले जाना चाहिए, ठंडा पानी या ओआरएस देना चाहिए और शरीर पर ठंडे पानी की पट्टियां रखनी चाहिए। स्थिति गंभीर होने पर तुरंत अस्पताल ले जाना जरूरी है।
आयुष विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे दोपहर 12 से 4 बजे के बीच धूप में निकलने से बचें, हल्के रंग और ढीले कपड़े पहनें तथा दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं। बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है।
अंत में, विभाग ने कहा कि सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है। सही खानपान, नियमित दिनचर्या और प्राकृतिक उपायों को अपनाकर इस भीषण गर्मी में भी स्वस्थ और सुरक्षित रहा जा सकता है।