इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण और पर्यटन विकास की दृष्टि से यह एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश लगातार पर्यटन के क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है और इस वर्ष प्रदेश में आने वाले पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वन्यजीवों का संरक्षण न केवल जैव विविधता के लिए आवश्यक है, बल्कि यह प्रदेश की पर्यटन संभावनाओं को भी मजबूत करता है।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार विलुप्तप्राय और संकटग्रस्त प्रजातियों के संरक्षण और संवर्धन के लिए लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि घड़ियाल और कछुओं का पुनर्वास उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है, जिससे आने वाले वर्षों में इन प्रजातियों की संख्या में स्थायी बढ़ोतरी सुनिश्चित की जा सकेगी।
मुख्यमंत्री ने कूनो क्षेत्र में चल रहे चीता पुनर्स्थापन अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि यह परियोजना माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल पर प्रारंभ हुई थी और अब निरंतर सफलता की ओर अग्रसर है। उन्होंने जानकारी दी कि हाल ही में बोत्सवाना से लाए गए 9 चीतों को भी कूनो में छोड़ा गया है, जिससे कूनो क्षेत्र में चीतों की कुल संख्या बढ़कर 48 हो गई है।
घड़ियाल एवं कछुआ रिलीज कार्यक्रम पालपुर फोर्ट के सामने, कूनो नदी के तट पर आयोजित किया गया। कार्यक्रम के माध्यम से कुल 53 घड़ियाल नदी में छोड़े गए, जिनमें 28 नर और 25 मादा शामिल हैं। इसके साथ ही 25 कछुओं को भी प्राकृतिक जलधारा में सुरक्षित रूप से छोड़ा गया। इन सभी जीवों को वैज्ञानिक पद्धति और विशेषज्ञों की निगरानी में नदी में पुनःस्थापित किया गया।
इस अवसर पर राष्ट्रीय चम्बल अभयारण्य, देवरी, मुरैना की ओर से मुख्यमंत्री को स्मृति चिन्ह भी भेंट किए गए। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में वन विभाग के अधिकारी, संरक्षण विशेषज्ञ और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।
घड़ियाल रिलीज कार्यक्रम के दौरान हेमंत खंडेलवाल भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने भी कूनो नदी में घड़ियाल छोड़कर संरक्षण अभियान में सहभागिता निभाई।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार का संकल्प है कि प्रदेश को वन्यजीव संरक्षण का मॉडल राज्य बनाया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि कूनो नेशनल पार्क जैसे संरक्षित क्षेत्र न केवल जैव विविधता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और आजीविका के नए अवसर भी पैदा कर रहे हैं।
कार्यक्रम के अंत में वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि भविष्य में भी कूनो क्षेत्र में जलीय जीवों और अन्य संकटग्रस्त प्रजातियों के संरक्षण को लेकर इसी तरह के वैज्ञानिक और दीर्घकालिक प्रयास जारी रहेंगे, जिससे प्राकृतिक संतुलन को बनाए रखा जा सके।