स्थानीय नागरिकों, जनप्रतिनिधियों और पूर्व पार्षद टीकम राठौर ने आरोप लगाया है कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता मानकों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है। उनके अनुसार, रेत, सीमेंट और ईंट जैसी बुनियादी निर्माण सामग्री में भारी अनियमितताएं बरती जा रही हैं। पुरानी और जर्जर ईंटों का उपयोग किया जा रहा है, जिनमें न तो मजबूती है और न ही मानक के अनुरूप संरचना।
निर्माण कार्य में तकनीकी खामियों की भी शिकायतें सामने आई हैं। बताया जा रहा है कि कॉलम में रिंग स्पेसिफिकेशन का पालन नहीं किया जा रहा है। वहीं, ग्राउंड बीम डालने से पहले आवश्यक फिलिंग और कंपैक्शन नहीं किया गया, जिससे भविष्य में फ्लोर के दबने और कमजोर होने की आशंका जताई जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, ग्राउंड बीम का सही निर्माण भवन की मजबूती के लिए बेहद जरूरी होता है, लेकिन यहां इसे नजरअंदाज किया गया है।
इसके अलावा, कंक्रीट की मजबूती के लिए आवश्यक ‘तराई’ प्रक्रिया में भी लापरवाही सामने आई है। सामान्यतः कंक्रीट सेट होने के बाद उसे जूट बोरों से ढककर 7 से 14 दिनों तक नियमित पानी दिया जाता है, ताकि उसमें नमी बनी रहे और दरारें न आएं। लेकिन निर्माण स्थल पर इस प्रक्रिया का पालन होते नहीं दिख रहा, खासकर गर्मी के मौसम में यह लापरवाही और भी गंभीर मानी जा रही है।
इन अनियमितताओं के चलते वार्डवासियों में भारी नाराजगी है। नाम न छापने की शर्त पर कुछ लोगों ने बताया कि यदि जल्द ही निर्माण कार्य की गुणवत्ता में सुधार नहीं हुआ, तो वे विरोध स्वरूप निर्माणाधीन ढांचे को गिराने तक का कदम उठा सकते हैं।
सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि ये आंगनबाड़ी केंद्र छोटे बच्चों के उपयोग के लिए बनाए जा रहे हैं। ऐसे में घटिया निर्माण सीधे तौर पर उनकी सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है। यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगाई गई, तो यह लापरवाही किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।
मामले में एक और गंभीर आरोप यह भी है कि संबंधित ठेकेदार हरिश्चंद्र दुबे ने कथित रूप से एक-दो नहीं, बल्कि 20 से अधिक आंगनबाड़ी निर्माण कार्य अपने हाथ में ले रखे हैं, और लगभग सभी जगह इसी तरह की अनियमितताओं की शिकायतें मिल रही हैं। इससे पूरे मामले में मिलीभगत की आशंका भी जताई जा रही है।
चौंकाने वाली बात यह है कि इतने गंभीर आरोपों के बावजूद जिम्मेदार विभाग और अधिकारी अब तक खामोश हैं। न तो कोई निरीक्षण हुआ है और न ही कोई ठोस कार्रवाई की गई है, जिससे लोगों का भरोसा प्रशासन पर कमजोर पड़ता दिख रहा है।
स्थानीय नागरिकों ने इस मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि बच्चों की सुरक्षा से जुड़े इस मुद्दे पर किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए। अब बड़ा सवाल यही है कि आखिर जिम्मेदार तंत्र कब जागेगा और कब दोषियों को जवाबदेह ठहराया जाएगा।