कवर्धा में युवाओं ने प्रधानमंत्री को खून से लिखा पत्र, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग

कवर्धा में युवाओं ने नीट परीक्षा में कथित पेपर लीक, प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और आंदोलनरत छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई के विरोध में प्रधानमंत्री के नाम खून से पत्र लिखकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, निष्पक्ष जांच और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग उठाई।

Jul 25, 2026 - 12:01
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कवर्धा में युवाओं ने प्रधानमंत्री को खून से लिखा पत्र, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग

UNITED NEWS OF ASIA. सौरभ नामदेव, कवर्धा l नीट परीक्षा में कथित पेपर लीक, विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार सामने आ रही अनियमितताओं तथा आंदोलनरत युवाओं पर हुए लाठीचार्ज के विरोध में कवर्धा के युवाओं ने अनोखा प्रदर्शन करते हुए महात्मा गाँधी जी के प्रतिमा के सामने नारेबाजी करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम अपने खून से पत्र लिखा।

प्रदर्शन के दौरान युवाओं ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि परीक्षा प्रणाली में जनता का भरोसा कमजोर हुआ है और इसकी नैतिक जिम्मेदारी सरकार को लेनी चाहिए। प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व कर रहे युवा नेता विकाश केशरी ने कहा कि देशभर के लाखों छात्र-छात्राएं वर्षों तक कठिन मेहनत करके प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं।



ऐसे में यदि परीक्षा की गोपनीयता पर सवाल उठते हैं या अनियमितताओं के आरोप सामने आते हैं, तो सबसे बड़ा नुकसान उन मेहनती युवाओं का होता है। उनका कहना था कि युवाओं का भविष्य किसी भी सरकार के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता होना चाहिए, लेकिन बार-बार ऐसी घटनाओं से छात्रों में निराशा और असंतोष बढ़ रहा है।

युवा कांग्रेसी रोहन शर्मा और चिराग यादव ने बताया की प्रधानमंत्री को संबोधित अपने पत्र में मांग की कि परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी और सुरक्षित बनाया जाए, सभी मामलों की निष्पक्ष जांच कराई जाए, दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए तथा केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से इस्तीफा दें।

प्रदर्शन के दौरान डोमन पोर्ते, संजय पटेल ने आरोप लगाया कि जब युवा अपने भविष्य को लेकर लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठाते हैं, तब उनकी बात सुनने के बजाय उन पर बल प्रयोग किया जाता है।

उन्होंने आंदोलनरत छात्रों पर हुए लाठीचार्ज की निंदा करते हुए कहा कि लोकतंत्र में अपनी मांग रखना प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है और सरकार को छात्रों की बात सुननी चाहिए, न कि उन्हें दबाने का प्रयास करना चाहिए। तरुण चन्द्रवंशी, गौरांश पाल ने कहा कि यह आंदोलन किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि देश के करोड़ों छात्रों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के भविष्य की रक्षा के लिए है।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार शीघ्र ठोस कदम नहीं उठाती, तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा तथा जिले से लेकर राज्य और राष्ट्रीय स्तर तक शांतिपूर्ण जनआंदोलन चलाया जाएगा।

 कार्यक्रम के अंत में युवाओं ने प्रधानमंत्री से अपील की कि वे व्यक्तिगत हस्तक्षेप कर परीक्षा प्रणाली में सुधार सुनिश्चित करें, पेपर लीक के दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई कराएं तथा देश के युवाओं का विश्वास दोबारा स्थापित करने के लिए प्रभावी कदम उठाएं। उक्त कार्यक्रम मे विकाश केशरी, रोहन शर्मा, प्रतीक मिश्रा, तरुण चंद्रवंशी, डोमन पोर्ते, मनु वर्मा, संजय पटेल, गौरांश पाल, चिराग यादव, जित्तू चन्द्रवंशी सहित अन्य कार्यकर्ता उपस्थित थे l