कावेरी सीड्स कंपनी पर 132 किसानों से 3.15 करोड़ रुपये हड़पने का गंभीर आरोप, किसानों में आक्रोश
महासमुंद, रायपुर और बलौदाबाजार जिले के 132 किसानों ने कावेरी सीड्स कंपनी पर 3 करोड़ 15 लाख रुपये की धोखाधड़ी का आरोप लगाया है। किसानों ने राज्यपाल, मुख्यमंत्री और बीज अनुज्ञापन अधिकारी से कंपनी के सभी उत्पादों और व्यापार पर तत्काल प्रतिबंध लगाने की मांग की है।
UNITED NEWS OF ASIA. जगदीश पटेल, सरायपाली महासमुंद। छत्तीसगढ़ के महासमुंद, रायपुर और बलौदाबाजार जिलों के किसानों ने कावेरी सीड्स कंपनी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि कंपनी ने 132 किसानों से लगभग 3 करोड़ 15 लाख रुपये की राशि हड़प ली है। इस मामले को लेकर किसानों में भारी आक्रोश व्याप्त है और उन्होंने इसे सुनियोजित धोखाधड़ी करार दिया है।
किसानों का आरोप है कि कावेरी सीड्स कंपनी ने उनसे लीज पर कृषि भूमि लेकर बीज उत्पादन का कार्य कराया, लेकिन न तो किसानों को बीज के बदले भुगतान किया गया और न ही मजदूरी की राशि दी गई। कई किसानों का कहना है कि महीनों बीत जाने के बावजूद कंपनी ने उनकी मेहनत की कमाई रोक रखी है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति बेहद खराब हो गई है।
पीड़ित किसानों के अनुसार, भुगतान की मांग करने पर कंपनी द्वारा बार-बार आश्वासन दिया गया, लेकिन अंततः कंपनी अधिकारियों ने बैठक के लिए बुलाकर भुगतान करने से साफ इनकार कर दिया। किसानों का कहना है कि यह व्यवहार न केवल अनुचित है, बल्कि एक गंभीर आपराधिक धोखाधड़ी का मामला भी बनता है।
इस प्रकरण को लेकर किसानों ने राज्यपाल, मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ और राज्य अनुज्ञापन अधिकारी (बीज) को ज्ञापन सौंपकर कावेरी सीड्स कंपनी के सभी उत्पादों एवं व्यापार पर तत्काल प्रतिबंध लगाने की मांग की है। किसानों का कहना है कि जब तक उन्हें उनकी पूरी बकाया राशि नहीं मिल जाती, तब तक कंपनी को राज्य में किसी भी प्रकार का व्यवसाय करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।
कंपनी अधिकारियों और किसानों के बीच हाल ही में आयोजित बैठक भी पूरी तरह विफल रही। बैठक में किसी प्रकार का समाधान नहीं निकलने से किसानों में नाराजगी और बढ़ गई है। पीड़ित किसानों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र भुगतान नहीं किया गया, तो वे आंदोलन, धरना-प्रदर्शन और चक्का जाम जैसे कदम उठाने के लिए मजबूर होंगे।
किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषी कंपनी एवं अधिकारियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। किसानों का कहना है कि इस तरह की घटनाएं कृषि क्षेत्र में निजी कंपनियों की मनमानी को उजागर करती हैं, जिससे किसानों का भरोसा टूट रहा है।