धान खरीदी व्यवस्था की खुली पोल : रुसे धान खरीदी केंद्र बना लापरवाही का अड्डा, भगवान के भरोसे सरकारी धान
“G*D मराए प्रशासन और सरकार… खरीदी खत्म, मैं घर जा रहा हूं, पड़े रहे धान!” — यह बयान किसी आम व्यक्ति का नहीं, बल्कि रुसे धान खरीदी केंद्र के जिम्मेदार प्रबंधक का है।
UNITED NEWS OF ASIA. सौरभ नामदेव, कवर्धा | कबीरधाम जिले में धान खरीदी व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। एक ओर कवर्धा जिला देशभर में लगभग 7 करोड़ रुपये के धान घोटाले को लेकर चर्चा में है,तो वहीं कबीरधाम जिले के रुसे धान खरीदी केंद्र में धान के रखरखाव को लेकर हालात बेहद चिंताजनक और शर्मनाक सामने आए हैं। यहां सरकारी धान न तो गोदाम में सुरक्षित रखा गया है और न ही तिरपाल या डैमेज शीट से ढंका गया है, बल्कि सैकड़ों क्विंटल धान खुले आसमान के नीचे पड़ा हुआ है। प्रशासनिक नियमों के अनुसार धान भंडारण के लिए दो लेयर डैमेज शीट लगाना अनिवार्य है, लेकिन रुसे केंद्र में इन नियमों को पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया है, जिससे सरकारी संपत्ति को सीधा नुकसान होने का खतरा मंडरा रहा है।
मौके पर कई जगह धान के बोरे फटे हुए दिखाई दे रहे हैं और धान जमीन पर बिखरा हुआ है। बारिश, नमी, पशुओं और चोरी जैसी संभावनाओं के बीच धान को इस तरह खुले में छोड़ देना यह साबित करता है कि जिम्मेदारों को न तो नियमों की चिंता है और न ही सरकारी नुकसान की। यह स्थिति किसी साधारण लापरवाही का मामला नहीं लगती, बल्कि एक बार फिर बड़े सॉर्टेज की जमीन तैयार किए जाने जैसी प्रतीत हो रही है।
रुसे प्रबंधक का बेकाबू रवैया, प्रशासन को गाली
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जब मीडिया ने धान के रखरखाव और नियमों को लेकर सवाल किए, तो प्रबंधक ने न सिर्फ जवाब देने से बचने की कोशिश की, बल्कि प्रशासन और सरकार के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया।
यह व्यवहार न केवल सेवा नियमों का उल्लंघन है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि प्रबंधक को किसी कार्रवाई का भय नहीं है।
उन्होंने यह तक कह दिया कि खरीदी खत्म हो चुकी है, वह अपने घर जा रहे हैं और धान चाहे जैसे पड़ा रहे। एक जिम्मेदार पद पर बैठे अधिकारी की यह भाषा और गैरजिम्मेदाराना बयान व्यवस्था पर गहरे सवाल खड़े करता है।
यह कोई पहली बार नहीं है जब रुसे धान खरीदी केंद्र चर्चा में आया हो। 2024–25 सत्र में भी इसी केंद्र से लगभग 1300 क्विंटल धान का सॉर्टेज सामने आया था, लेकिन आज तक न तो इसकी रिकवरी हो सकी और न ही किसी पर ठोस कार्रवाई हुई। अब एक बार फिर वही हालात बनते दिख रहे हैं, जिससे इस वर्ष भी बड़े नुकसान की आशंका और गहरी हो गई है।
रुसे धान खरीदी केंद्र में खुले में रखा सरकारी धान न केवल प्रशासनिक लापरवाही का प्रतीक है, बल्कि यह पूरी धान खरीदी व्यवस्था की विश्वसनीयता पर भी सवालिया निशान लगा रहा है। अब निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि क्या इस गंभीर मामले की निष्पक्ष जांच होगी, क्या जिम्मेदार प्रबंधक पर कार्रवाई की जाएगी, या फिर हर बार की तरह इस बार भी सरकारी धान के साथ-साथ जवाबदेही भी खुले आसमान के नीचे छोड़ दी जाएगी। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो कबीरधाम में धान सॉर्टेज का एक और बड़ा मामला सामने आना तय माना जा रहा है।