रायपुर कृषि विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय सम्मान: “सर्वश्रेष्ठ सोयाबीन अनुसंधान केंद्र” का पुरस्कार

इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर को सोयाबीन अनुसंधान में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए राष्ट्रीय स्तर पर “सर्वश्रेष्ठ केंद्र पुरस्कार” से सम्मानित किया गया। यह सम्मान हैदराबाद में आयोजित अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना की वार्षिक बैठक में प्रदान किया गया।

Apr 14, 2026 - 13:17
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रायपुर कृषि विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय सम्मान: “सर्वश्रेष्ठ सोयाबीन अनुसंधान केंद्र” का पुरस्कार

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l रायपुर इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (आईजीकेवी), रायपुर ने कृषि अनुसंधान के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। विश्वविद्यालय में संचालित अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना (सोयाबीन) को वर्ष 2023-2025 की मूल्यांकन अवधि के दौरान उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए राष्ट्रीय स्तर पर “सर्वश्रेष्ठ केंद्र पुरस्कार” से सम्मानित किया गया है।

यह प्रतिष्ठित सम्मान हैदराबाद स्थित प्रोफेसर जयशंकर तेलंगाना कृषि विश्वविद्यालय में आयोजित अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना (सोयाबीन) की 56वीं वार्षिक समूह बैठक में 9 अप्रैल 2026 को प्रदान किया गया।

कृषि मंत्री ने दी बधाई
इस उपलब्धि पर छत्तीसगढ़ के कृषि विकास एवं किसान कल्याण मंत्री रामविचार नेताम ने विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों और शोध टीम को बधाई देते हुए इसे राज्य के लिए गर्व का विषय बताया। उन्होंने कहा कि यह सम्मान किसानों की आय बढ़ाने और कृषि क्षेत्र को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान का प्रतीक है।

बहुआयामी उत्कृष्टता के लिए मिला सम्मान
यह पुरस्कार अनुसंधान परीक्षण, वैज्ञानिक प्रकाशन, प्रजनन नवाचार, तकनीकी विकास, किसान संपर्क कार्यक्रम और बीज उत्पादन जैसे विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के आधार पर प्रदान किया गया। इस उपलब्धि को हासिल करने में विश्वविद्यालय की टीम—डॉ. सुनील कुमार नाग, डॉ. रामा मोहन सावु और डॉ. ऐश्वर्या टंडन—की अहम भूमिका रही।

पुरस्कार समारोह में देश के प्रमुख कृषि वैज्ञानिकों और संस्थानों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति रही, जिनमें आईसीएआर-राष्ट्रीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान और आईसीएआर-भारतीय तिलहन अनुसंधान संस्थान के निदेशक भी शामिल थे।

अनुसंधान और नवाचार में उल्लेखनीय उपलब्धियां
आईजीकेवी, रायपुर केंद्र ने पिछले तीन वर्षों में पादप प्रजनन, सस्य विज्ञान, पादप रोग विज्ञान और सूक्ष्मजीव विज्ञान जैसे क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य किया है। केंद्र ने 1000 से अधिक जर्मप्लाज्म संग्रह का प्रबंधन करते हुए उन्नत किस्मों—जैसे आएससी 11-42, आएससी 11-72 और आएससी 12-32—का विकास किया है।

इसके अलावा, पूर्वी भारत के लिए तीन नई सोयाबीन किस्मों का विकास, छह उन्नत उत्पादन एवं संरक्षण तकनीकों का निर्माण और तीन जर्मप्लाज्म लाइनों का पंजीकरण जैसी उपलब्धियां भी दर्ज की गई हैं।

किसानों तक पहुंच और तकनीकी विस्तार
विश्वविद्यालय ने अनुसंधान के साथ-साथ किसानों तक तकनीक पहुंचाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। हर वर्ष 100 से अधिक फ्रंटलाइन डेमोंस्ट्रेशन आयोजित किए गए और विशेष रूप से कांकेर जिले के जनजातीय किसानों को लाभ पहुंचाया गया।

प्रजनक बीज उत्पादन और न्यूक्लियस बीज उत्पादन में भी केंद्र ने उल्लेखनीय सफलता हासिल की है, जिससे किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले बीज उपलब्ध हो सके हैं।

नवाचार और भविष्य की दिशा
केंद्र ने जलवायु-अनुकूल कृषि तकनीकों, समेकित पोषक तत्व प्रबंधन और खरपतवार नियंत्रण जैसे क्षेत्रों में भी नवाचार किए हैं। इसके साथ ही माइक्रोबियल कंसोर्टिया आधारित बीज उपचार तकनीक जैसे नए प्रयोगों से सोयाबीन उत्पादन में वृद्धि और पोषक तत्व उपयोग दक्षता में सुधार हुआ है।

यह पुरस्कार न केवल वैज्ञानिकों की मेहनत और समर्पण का परिणाम है, बल्कि यह किसानों के हित में किए जा रहे सतत प्रयासों की भी पहचान है।

अंततः, यह उपलब्धि दर्शाती है कि इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय भविष्य में भी नवाचार के माध्यम से राष्ट्रीय कृषि विकास में महत्वपूर्ण योगदान देता रहेगा।