लाल गलियारे में दरकी एक और दीवार: 45 साल बाद दो हार्डकोर नक्सलियों ने छोड़ी बंदूक, थामा विकास का हाथ
तेलंगाना के मंचेरियल जिले में नक्सल आंदोलन से जुड़े दो कुख्यात नक्सलियों बंदी प्रकाश और पुल्लूरी प्रसाद ने 45 साल बाद आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में वापसी की है। कभी विद्रोह का चेहरा रहे दोनों अब विकास और शांति के प्रतीक बन गए हैं। पुलिस के मानवीय रुख और सरकार की पुनर्वास नीति ने इन दोनों को आत्मसमर्पण के लिए प्रेरित किया। डीजीपी शिवधर रेड्डी की मौजूदगी में उन्होंने औपचारिक रूप से आत्मसमर्पण किया।
UNITED NEWS OF ASIA. महेश राव, बस्तर। लंबे समय से नक्सल आंदोलन का गढ़ रहे लाल गलियारे से एक और राहतभरी खबर सामने आई है। पड़ोसी राज्य तेलंगाना में दो हार्डकोर नक्सलियों —
बंदी प्रकाश और पुल्लूरी प्रसाद — ने पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया है। यह दोनों नक्सली बीते 45 वर्षों से भूमिगत रहकर माओवादी संगठन की विभिन्न इकाइयों में सक्रिय थे।
जानकारी के अनुसार, मंचेरियल जिले के सिंगरेनी खदान क्षेत्र के श्रमिक परिवारों से निकलकर बंदी प्रकाश और पुल्लूरी प्रसाद ने युवा अवस्था में नक्सल आंदोलन का रास्ता अपनाया था। वर्षों तक जंगलों में रहकर दोनों ने कई मोर्चों पर सक्रिय भूमिका निभाई, लेकिन बढ़ती उम्र और खराब स्वास्थ्य ने उन्हें आत्ममंथन के लिए मजबूर किया।
तेलंगाना पुलिस की लगातार पहल, संवाद और सरकार की पुनर्वास नीति ने इन दोनों को आत्मसमर्पण के लिए प्रेरित किया। तेलंगाना के पुलिस महानिदेशक शिवधर रेड्डी की उपस्थिति में दोनों ने आत्मसमर्पण कर हिंसा की राह छोड़ दी। इस दौरान पुलिस अधिकारियों ने उन्हें विश्वास दिलाया कि राज्य सरकार उनके पुनर्वास और सामाजिक पुनर्स्थापन में पूरा सहयोग करेगी।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, बंदी प्रकाश ने नक्सल संगठन में 1970 के दशक के उत्तरार्ध में प्रवेश किया था। उन्होंने माओवादी आंदोलन के कई बड़े अभियानों में रणनीतिक भूमिका निभाई थी। वहीं पुल्लूरी प्रसाद भी नॉर्थ तेलंगाना स्पेशल जोन कमेटी में लंबे समय तक सक्रिय रहे।
आत्मसमर्पण के बाद दोनों नक्सलियों ने कहा कि उन्होंने वर्षों तक हिंसा का मार्ग चुना, लेकिन अब वे समाज और आने वाली पीढ़ी के लिए शांति और विकास का रास्ता अपनाना चाहते हैं।
तेलंगाना डीजीपी शिवधर रेड्डी ने कहा कि यह आत्मसमर्पण केवल दो व्यक्तियों का नहीं, बल्कि एक विचारधारा की हार और मानवीय मूल्यों की जीत है। पुलिस और सरकार ऐसे सभी लोगों का स्वागत करती है जो हिंसा छोड़कर मुख्यधारा से जुड़ना चाहते हैं।
इस आत्मसमर्पण ने न केवल तेलंगाना बल्कि छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में भी सकारात्मक संदेश दिया है कि संवाद, विश्वास और पुनर्वास ही नक्सलवाद को समाप्त करने का स्थायी उपाय है।