गुरु पूर्णिमा पर सुरेश्वर महापीठ शंकर खमाडीह में रुद्राभिषेक एवं भंडारे का आयोजन, समरसता का दिया संदेश

गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर सुरेश्वर महापीठ शंकर खमाडीह में समरसता संकल्प के तहत वैदिक मंत्रोच्चार के साथ रुद्राभिषेक एवं पूजा-अर्चना का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में श्रम मंडल उपाध्यक्ष किशोर महानंद ने प्रदेशवासियों को गुरु पूर्णिमा की शुभकामनाएं देते हुए छत्तीसगढ़ की सुख-समृद्धि की कामना की। श्रद्धालुओं के लिए भंडारे का भी आयोजन किया गया।

Jul 29, 2026 - 18:01
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गुरु पूर्णिमा पर सुरेश्वर महापीठ शंकर खमाडीह में रुद्राभिषेक एवं भंडारे का आयोजन, समरसता का दिया संदेश

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर सुरेश्वर महापीठ शंकर खमाडीह में समरसता संकल्प के तहत धार्मिक एवं आध्यात्मिक कार्यक्रम का आयोजन श्रद्धा और भक्ति के साथ किया गया। कार्यक्रम में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान शिव का रुद्राभिषेक संपन्न हुआ और प्रदेश की सुख-समृद्धि, शांति एवं जनकल्याण की कामना की गई। आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर गुरु परंपरा के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की।

कार्यक्रम का शुभारंभ महामंडलेश्वर स्वामी राजेशवर नंद के सान्निध्य में वैदिक मंत्रों के उच्चारण के साथ रुद्राभिषेक से हुआ। पूजा-अर्चना के दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान शिव का जलाभिषेक कर सुख, शांति और समृद्धि की प्रार्थना की। धार्मिक अनुष्ठान के दौरान पूरे मंदिर परिसर में भक्तिमय वातावरण बना रहा।

इस अवसर पर श्रम मंडल उपाध्यक्ष किशोर महानंद ने भी विधि-विधान से पूजा-अर्चना एवं रुद्राभिषेक में सहभागिता की। उन्होंने प्रदेशवासियों को गुरु पूर्णिमा की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान सर्वोच्च माना गया है। गुरु ज्ञान, संस्कार और जीवन के सही मार्ग का बोध कराते हैं। उन्होंने सभी से गुरुजनों के प्रति सम्मान और उनके बताए मार्ग पर चलने का संदेश दिया।

किशोर महानंद ने छत्तीसगढ़ की खुशहाली, समृद्धि और प्रदेशवासियों के सुखद जीवन की कामना करते हुए कहा कि ऐसे धार्मिक आयोजन समाज में एकता, भाईचारा और समरसता की भावना को मजबूत करते हैं। उन्होंने संत शिरोमणि दास की 650वीं जयंती के अवसर पर भी प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं दीं और उनके बताए आदर्शों को अपनाने का आह्वान किया।

धार्मिक अनुष्ठान के उपरांत श्रद्धालुओं के लिए भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया। आयोजन का उद्देश्य केवल धार्मिक परंपराओं का निर्वहन ही नहीं, बल्कि समाज में सेवा, सहयोग और समरसता की भावना को बढ़ावा देना भी रहा। श्रद्धालुओं ने भंडारे में शामिल होकर सामाजिक एकता और सद्भाव का संदेश दिया।

कार्यक्रम में स्वामी राजेशवर नंद, राम कृष्णा त्रिपाठी, ओम राठौर, कायम सिंह, भूषण साहू सहित अनेक गणमान्य नागरिक एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे। सभी ने गुरु पूर्णिमा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए भारतीय संस्कृति और गुरु-शिष्य परंपरा को समाज की अमूल्य धरोहर बताया।

पूरे आयोजन के दौरान भक्तिमय माहौल बना रहा और श्रद्धालुओं ने भगवान शिव की आराधना के साथ गुरु परंपरा के प्रति अपनी आस्था प्रकट की। कार्यक्रम का समापन सामूहिक प्रार्थना, प्रसाद वितरण और समाज में शांति, सद्भाव एवं समरसता बनाए रखने के संकल्प के साथ हुआ। आयोजन ने गुरु पूर्णिमा के आध्यात्मिक महत्व को जन-जन तक पहुंचाने के साथ सामाजिक एकता और सांस्कृतिक मूल्यों को भी मजबूत करने का संदेश दिया।