गड़मिरी में शहीद हरीश कोर्राम की प्रतिमा का अनावरण, प्रथम पुण्यतिथि पर दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि
दंतेवाड़ा जिले के गड़मिरी गांव में शहीद हरीश कोर्राम की प्रथम पुण्यतिथि पर उनकी प्रतिमा का भव्य अनावरण किया गया। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधि, पुलिस अधिकारी और ग्रामीणों ने शहीदों के बलिदान को नमन किया।
UNITED NEWS OF ASIA. कमलेश सिंह ठाकुर, दंतेवाड़ा/छत्तीसगढ़। दंतेवाड़ा जिले के गड़मिरी गांव में आज देश के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाले शहीद हरीश कोर्राम की प्रथम पुण्यतिथि के अवसर पर उनकी प्रतिमा का भव्य अनावरण किया गया। यह कार्यक्रम शहीदों के सम्मान, बलिदान और राष्ट्रसेवा के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का सशक्त माध्यम बना।
गौरतलब है कि शहीद हरीश कोर्राम बीजापुर जिले में चलाए गए नक्सल विरोधी अभियान के दौरान वीरगति को प्राप्त हुए थे। उनके साहस, कर्तव्यनिष्ठा और अदम्य वीरता को स्मरण करते हुए कार्यक्रम में बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, पुलिस अधिकारी, सुरक्षा बलों के जवान और स्थानीय ग्रामीण शामिल हुए। पूरे वातावरण में देशभक्ति और श्रद्धा का भाव स्पष्ट रूप से झलक रहा था।
कार्यक्रम की शुरुआत शहीद की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर दो मिनट के मौन के साथ की गई। इसके पश्चात वक्ताओं ने शहीद हरीश कोर्राम के जीवन, उनके संघर्ष और बलिदान पर प्रकाश डाला। वक्ताओं ने कहा कि शहीदों का जीवन न केवल सुरक्षा बलों के जवानों के लिए बल्कि समाज के प्रत्येक नागरिक, विशेषकर युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है।
इस अवसर पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक दंतेवाड़ा आर. के. बर्मन ने अपने संबोधन में कहा कि शहीदों का बलिदान कभी व्यर्थ नहीं जाता। उन्होंने कहा कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति और विकास की स्थापना शहीद जवानों के त्याग का ही परिणाम है। उन्होंने युवाओं से राष्ट्रसेवा, अनुशासन और कर्तव्य के मार्ग पर चलने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के दौरान किरंदुल क्षेत्र में शहीद डूमा मरकाम को भी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। उपस्थित जनसमूह ने दोनों शहीदों के अमर बलिदान को नमन करते हुए देश की अखंडता और सुरक्षा के लिए सदैव समर्पित रहने का संकल्प दोहराया।
पूरे आयोजन ने यह संदेश दिया कि शहीदों की स्मृति केवल स्मारकों तक सीमित नहीं, बल्कि उनके आदर्शों को अपनाकर समाज और राष्ट्र निर्माण में योगदान देना ही सच्ची श्रद्धांजलि है। गड़मिरी गांव में आयोजित यह कार्यक्रम देशभक्ति, एकता और बलिदान की भावना को और अधिक सुदृढ़ करने वाला सिद्ध हुआ।