किसानों के हित में सख्त कार्रवाई, खरीफ 2026 में उर्वरक कालाबाजारी और जमाखोरी के 516 मामलों में कार्रवाई
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश और कृषि मंत्री रामविचार नेताम के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ में उर्वरकों की कालाबाजारी, जमाखोरी और अनियमित बिक्री के खिलाफ व्यापक अभियान चलाया जा रहा है। कृषि उत्पादन आयुक्त सिद्धार्थ परदेशी के नेतृत्व में खरीफ 2026 के दौरान अब तक 516 प्रवर्तन कार्रवाई की गई हैं। इनमें 13 FIR, 72 न्यायालयीन प्रकरण, 16 लाइसेंस निरस्तीकरण, 115 जप्ती, 107 लाइसेंस निलंबन और 193 विक्रय प्रतिबंध की कार्रवाई शामिल है। किसानों से निर्धारित दर पर गुणवत्तापूर्ण उर्वरक खरीदने और अनियमितता की सूचना कृषि अधिकारियों को देने की अपील की गई है।
UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l किसानों को गुणवत्तापूर्ण उर्वरक निर्धारित दर पर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ सरकार ने उर्वरकों की कालाबाजारी, जमाखोरी और अनियमित बिक्री के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश, कृषि मंत्री रामविचार नेताम के मार्गदर्शन और कृषि उत्पादन आयुक्त सिद्धार्थ परदेशी के नेतृत्व में कृषि विभाग द्वारा प्रदेशभर में व्यापक प्रवर्तन अभियान चलाया जा रहा है।
कृषि विभाग के अनुसार उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 के तहत चलाए जा रहे अभियान के दौरान खरीफ 2026 में अब तक 516 मामलों में कार्रवाई की गई है। खरीफ 2025 में जहां इस तरह की कार्रवाई के केवल 44 मामले सामने आए थे, वहीं इस वर्ष अब तक 472 अधिक मामलों में कार्रवाई की जा चुकी है। विभाग का कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य उर्वरक वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता बनाए रखना और किसानों को किसी भी प्रकार की परेशानी से बचाना है।
कृषि उत्पादन आयुक्त सिद्धार्थ परदेशी के प्रशासनिक नेतृत्व में विभागीय अमले द्वारा उर्वरक विक्रय प्रतिष्ठानों की नियमित और आकस्मिक जांच की जा रही है। निरीक्षण के दौरान दुकानों में उपलब्ध उर्वरक का स्टॉक, भंडारण व्यवस्था, विक्रय अभिलेख, निर्धारित मूल्य, लाइसेंस और अन्य जरूरी दस्तावेजों की जांच की जा रही है। नियमों का उल्लंघन मिलने पर संबंधित व्यक्ति या प्रतिष्ठान के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है।
खरीफ 2026 में अब तक 13 मामलों में FIR दर्ज की गई है, जबकि 72 प्रकरणों में न्यायालयीन कार्रवाई की गई। इसके अलावा 16 उर्वरक विक्रय लाइसेंस निरस्त किए गए हैं। 115 मामलों में जप्ती, 107 मामलों में लाइसेंस निलंबन और 193 प्रकरणों में उर्वरक बिक्री पर प्रतिबंध की कार्रवाई की गई है।
विभागीय आंकड़ों के मुताबिक खरीफ 2025 में FIR का कोई मामला दर्ज नहीं हुआ था। उस दौरान चार मामलों में न्यायालयीन कार्रवाई, दो लाइसेंस निरस्तीकरण, दो जप्ती, तीन लाइसेंस निलंबन और 33 मामलों में विक्रय प्रतिबंध लगाया गया था। इस वर्ष कार्रवाई की संख्या में हुई वृद्धि को विभाग द्वारा प्रवर्तन व्यवस्था को मजबूत किए जाने के परिणाम के तौर पर देखा जा रहा है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने स्पष्ट किया है कि किसानों को गुणवत्तापूर्ण उर्वरक उचित और निर्धारित दर पर उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। वहीं कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने अधिकारियों को कालाबाजारी, जमाखोरी और नियमों के विपरीत उर्वरक बिक्री करने वालों के खिलाफ बिना किसी ढिलाई के कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
कृषि विभाग ने भी स्पष्ट किया है कि उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 के प्रावधानों का उल्लंघन करने वाले विक्रेताओं और प्रतिष्ठानों के खिलाफ कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। विभाग द्वारा उर्वरक की उपलब्धता और वितरण व्यवस्था पर लगातार निगरानी रखी जा रही है, ताकि किसानों को समय पर आवश्यक कृषि सामग्री मिल सके।
कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि उर्वरक खरीदते समय निर्धारित मूल्य और उत्पाद की गुणवत्ता की जांच करें। प्रत्येक खरीद पर बिल या रसीद अवश्य लें। यदि किसी विक्रेता द्वारा अधिक कीमत वसूलने, कालाबाजारी करने, अवैध रूप से उर्वरक का भंडारण करने या अन्य किसी प्रकार की अनियमितता की जाती है तो इसकी सूचना तत्काल निकटतम कृषि अधिकारी को दें।