मोदी सरकार ने मनरेगा की मूल आत्मा खत्म की, मजदूरों से छीना काम का अधिकार – डॉ. चरणदास महंत

छत्तीसगढ़ विधानसभा नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने महासमुंद में प्रेसवार्ता कर मोदी सरकार पर मनरेगा को कमजोर करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि नए कानून और फ्रेमवर्क के जरिए मनरेगा की संवैधानिक गारंटी समाप्त कर इसे सरकार की इच्छा पर निर्भर योजना बना दिया गया है, जिससे करोड़ों मजदूरों के अधिकारों पर संकट खड़ा हो गया है।

Jan 11, 2026 - 15:08
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मोदी सरकार ने मनरेगा की मूल आत्मा खत्म की, मजदूरों से छीना काम का अधिकार – डॉ. चरणदास महंत

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर | राष्ट्रव्यापी मनरेगा बचाव संग्राम के तहत छत्तीसगढ़ विधानसभा नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने महासमुंद जिला कांग्रेस भवन में आयोजित पत्रकारवार्ता को संबोधित किया। उन्होंने केंद्र की भाजपा नीत मोदी सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि सरकार ने मनरेगा की मूल आत्मा को समाप्त कर दिया है और श्रमिकों से उनका संवैधानिक काम का अधिकार छीन लिया है।

डॉ. महंत ने कहा कि मनरेगा महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज, काम की गरिमा और विकेन्द्रीकृत विकास की अवधारणा का जीवंत उदाहरण था। यह योजना संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिलने वाले अधिकारों पर आधारित थी, लेकिन नए फ्रेमवर्क के माध्यम से इसे एक सशर्त और केंद्र नियंत्रित योजना में बदल दिया गया है। अब मजदूरों को अधिकार के रूप में काम नहीं मिलेगा, बल्कि सरकार की इच्छा पर निर्भर रहना पड़ेगा।

उन्होंने कहा कि ‘सुधार’ के नाम पर लोकसभा में एक और बिल पारित कर दुनिया की सबसे बड़ी रोजगार गारंटी योजना को खत्म करने की कोशिश की गई है। सरकार ने न केवल गांधीजी का नाम हटाया, बल्कि 12 करोड़ से अधिक मनरेगा मजदूरों के अधिकारों को भी कुचल दिया है। कोविड-19 जैसी आपदा के दौरान यह योजना करोड़ों गरीब परिवारों के लिए जीवनरेखा साबित हुई थी।

डॉ. महंत ने आरोप लगाया कि अब मनरेगा के तहत सरकार जब चाहे काम रोक सकती है। फंड खत्म होने या फसल के मौसम का बहाना बनाकर मजदूरों को महीनों तक बेरोजगार रखा जा सकता है। इससे यह तय करने का अधिकार सरकार के हाथ में चला गया है कि गरीब कब काम करेंगे और कब भूखे रहेंगे।

उन्होंने यह भी कहा कि पहले मनरेगा में 90 प्रतिशत राशि केंद्र सरकार देती थी, लेकिन अब इसे 60:40 के अनुपात में कर दिया गया है। साथ ही राज्य सरकार को पहले 50 प्रतिशत राशि जमा करनी होगी, तभी केंद्र फंड जारी करेगा। राज्यों की आर्थिक स्थिति पहले से कमजोर है, जिससे आने वाले समय में मनरेगा धीरे-धीरे बंद होने की स्थिति में पहुंच जाएगी।

डॉ. महंत ने कहा कि पिछले 11 वर्षों में मोदी सरकार किसी भी वर्ष 100 दिन का रोजगार देने में असफल रही है। राष्ट्रीय औसत मात्र 38 दिनों का रहा है। 100 से 125 दिन मजदूरी की बात केवल एक छलावा है। उन्होंने ‘V.B.G.RAM.G.’ योजना को भी भ्रामक बताते हुए कहा कि भाजपा भगवान राम के नाम पर एक बार फिर जनता को गुमराह कर रही है।