इस अवसर पर पेंड्रावाहिन माता की मूर्ति की स्थापना वैदिक मंत्रोच्चार और विधि-विधान के साथ की गई। विद्वान पंडितों द्वारा मंत्रोच्चार के बीच संपन्न हुए इस अनुष्ठान ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। गांव के लोग सुबह से ही मंदिर परिसर में एकत्रित होने लगे थे और पूरे आयोजन के दौरान उनकी आस्था और उत्साह देखने लायक था।
प्राण-प्रतिष्ठा के इस पावन अवसर पर दो दिवसीय भव्य जात्रा का आयोजन भी किया गया। इस जात्रा में पारंपरिक वाद्ययंत्रों की गूंज और धार्मिक गीतों ने माहौल को पूरी तरह से आध्यात्मिक बना दिया। ढोल-नगाड़ों और झांझ-मंजीरों की धुन पर श्रद्धालु झूमते नजर आए, जिससे पूरे गांव में उत्सव जैसा वातावरण बन गया।
इस आयोजन की खास बात यह रही कि इसमें केवल स्थानीय ग्रामीण ही नहीं, बल्कि आसपास के क्षेत्रों और पड़ोसी जिलों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। खासतौर पर धमतरी जिले से आए श्रद्धालुओं की संख्या काफी अधिक रही। अनुमान है कि हजारों की संख्या में भक्त माता के दर्शन के लिए पहुंचे।
मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें इस बात का प्रमाण थीं कि लोगों की माता के प्रति कितनी गहरी आस्था है। आयोजन समिति द्वारा दूर-दराज से आए भक्तों के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई थीं, जिसमें पानी, प्रसाद और विश्राम की सुविधाएं शामिल थीं। इससे श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा नहीं हुई और वे पूरे आयोजन का आनंद ले सके।
स्थानीय पुजारी ने इस अवसर पर कहा कि पेंड्रावाहिन माता की कृपा पूरे क्षेत्र पर बनी रहे और सभी भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण हों। उन्होंने बताया कि यह मंदिर क्षेत्र की आस्था का प्रमुख केंद्र बनेगा और यहां नियमित रूप से पूजा-अर्चना एवं धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
इस आयोजन ने न केवल धार्मिक भावना को प्रबल किया, बल्कि गांव के सामाजिक ताने-बाने को भी मजबूत किया। सभी ग्रामीणों ने मिलकर इस कार्यक्रम को सफल बनाने में योगदान दिया, जिससे सामूहिक एकता और सहयोग की भावना भी देखने को मिली।
धोबनडीह गांव में आयोजित यह प्राण-प्रतिष्ठा समारोह आने वाले समय में क्षेत्र की धार्मिक पहचान को और मजबूत करेगा। यह आयोजन इस बात का उदाहरण है कि किस तरह पारंपरिक आस्था और सामूहिक प्रयास मिलकर एक भव्य और सफल आयोजन को जन्म देते हैं।