समझदार पालक ही बच्चों के सुरक्षित भविष्य की पहली सीढ़ी, धमतरी में आयोजित हुई 'समझदार पालक-सशक्त प्रदेश' कार्यशाला

धमतरी में आयोजित 'समझदार पालक-सशक्त प्रदेश' कार्यशाला में अभिभावकों को बच्चों के सुरक्षित, संवेदनशील और सकारात्मक पालन-पोषण के लिए जागरूक किया गया। विशेषज्ञों ने बच्चों के मानसिक, भावनात्मक और व्यक्तित्व विकास में परिवार की भूमिका पर विस्तार से जानकारी दी।

Jul 31, 2026 - 12:22
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समझदार पालक ही बच्चों के सुरक्षित भविष्य की पहली सीढ़ी, धमतरी में आयोजित हुई 'समझदार पालक-सशक्त प्रदेश' कार्यशाला

UNITED NEWS OF ASIA. रिजवान मेमन, धमतरी l बच्चों के अधिकारों की रक्षा, सुरक्षित पारिवारिक वातावरण और उनके समग्र विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से धमतरी में 'समझदार पालक-सशक्त प्रदेश' कार्यशाला का आयोजन किया गया। छत्तीसगढ़ राज्य बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा के दो दिवसीय धमतरी प्रवास के दौरान 28 जुलाई की शाम रूद्री रोड स्थित एक होटल में आयोजित इस कार्यशाला में लगभग 105 लोगों ने भाग लिया। इनमें 40 अभिभावकों ने सक्रिय सहभागिता करते हुए बच्चों के प्रभावी पालन-पोषण और व्यक्तित्व विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों से मार्गदर्शन प्राप्त किया।

कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य अभिभावकों को जागरूक और सक्षम बनाकर बच्चों के लिए सुरक्षित, सकारात्मक और संवेदनशील पारिवारिक वातावरण तैयार करना था। कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने बताया कि बच्चों का मानसिक, भावनात्मक और सामाजिक विकास काफी हद तक परिवार के माहौल और माता-पिता के व्यवहार पर निर्भर करता है। इसलिए अभिभावकों को बच्चों के साथ संवाद, विश्वास और सहयोग का रिश्ता मजबूत करना चाहिए।

कार्यक्रम में नगर निगम महापौर रामू रोहरा ने कहा कि इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रम समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का माध्यम बनते हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों को सुरक्षित और संस्कारित वातावरण उपलब्ध कराना परिवार और समाज दोनों की साझा जिम्मेदारी है। ऐसे आयोजन अभिभावकों को बच्चों की जरूरतों और अधिकारों के प्रति अधिक संवेदनशील बनाते हैं।

छत्तीसगढ़ राज्य बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने कहा कि बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की पहली जिम्मेदारी उनके माता-पिता की होती है। उन्होंने कहा कि हर पालक का दायित्व है कि वह बच्चों के अधिकारों की रक्षा करते हुए उनके समुचित संरक्षण और संतुलित विकास के लिए सकारात्मक वातावरण तैयार करे। उन्होंने अभिभावकों से बच्चों के साथ स्नेह, विश्वास और संवाद बनाए रखने की अपील की। उन्होंने यह भी कहा कि अपने बच्चों की देखभाल करना प्रत्येक माता-पिता का कर्तव्य है, लेकिन समाज को उन बच्चों के प्रति भी संवेदनशील होना चाहिए जो कठिन परिस्थितियों में जीवन बिता रहे हैं।

कार्यशाला में रायपुर से आईं मनोवैज्ञानिक डॉ. गार्गी पांडे ने बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण में माता-पिता की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि अभिभावकों का व्यवहार बच्चों के आत्मविश्वास, मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक विकास को गहराई से प्रभावित करता है। उन्होंने बच्चों के बदलते व्यवहार को समझने, उनकी भावनाओं का सम्मान करने और सकारात्मक संवाद स्थापित करने के व्यावहारिक तरीके भी साझा किए।

कार्यक्रम में दिव्यांशी शर्मा ने बच्चों के चार प्रमुख अधिकारों, राज्य बाल संरक्षण आयोग की भूमिका और उसके अधिकारों की जानकारी दी। वहीं जिला कार्यक्रम अधिकारी जगरानी एक्का ने अभिभावकों से बच्चों के प्रति संवेदनशील और सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने का आग्रह किया।

कार्यशाला के दौरान ज्ञानवर्धक और मनोरंजक गतिविधियों के माध्यम से अभिभावकों को व्यवहारिक प्रशिक्षण भी दिया गया, जिससे वे बच्चों की जरूरतों और भावनाओं को बेहतर ढंग से समझ सकें। कार्यक्रम में महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी-कर्मचारी, बाल कल्याण समिति के सदस्य, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन यशवंत बैस ने किया, जबकि आभार प्रदर्शन महेशराम मरकाम ने किया।