जांच में खुलासा: दिल्ली की हवा में 19 तरह के हानिकारक तत्व, स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा
एक वैज्ञानिक अध्ययन में खुलासा हुआ है कि दिल्ली की हवा में 19 प्रकार के हानिकारक तत्व मौजूद हैं, जिनमें कई कैंसरकारी हैं। ये तत्व पीएम 2.5 और पीएम 10 कणों के जरिए शरीर में प्रवेश कर श्वसन, हृदय और अन्य गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ाते हैं। विशेषज्ञों ने प्रदूषण के स्रोतों पर नियंत्रण को ही समाधान बताया है।
UNITED NEWS OF ASIA. दिल्ली की हवा को जहरीला यूं ही नहीं कहा जाता। हालिया वैज्ञानिक अध्ययन में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि राजधानी की हवा में 19 प्रकार के हानिकारक तत्व मौजूद हैं, जो सीधे तौर पर मानव स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहे हैं। इनमें से कई तत्व कैंसरकारी हैं, जबकि कुछ श्वसन तंत्र, हृदय और अन्य अंगों पर गंभीर दुष्प्रभाव डालते हैं।
आमतौर पर वायु प्रदूषण को पीएम 10 और पीएम 2.5 के स्तर के आधार पर मापा जाता है। पीएम 10 के कणों का व्यास 10 माइक्रोमीटर या उससे कम होता है, जबकि पीएम 2.5 के कण इससे भी कहीं अधिक सूक्ष्म होते हैं। पीएम 2.5 की बारीकी का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि ये इंसानी बाल की मोटाई से लगभग 30 गुना छोटे होते हैं। इसी कारण ये कण सांस के साथ सीधे फेफड़ों तक पहुंच जाते हैं और रक्त प्रवाह में भी प्रवेश कर सकते हैं।
पीएम 2.5 में मौजूद हानिकारक तत्वों की विस्तृत जानकारी के लिए जनवरी 2017 से 2021 के बीच दिल्ली की हवा के नमूनों का अध्ययन किया गया। इस शोध में पाया गया कि अलग-अलग मौसमों में इन तत्वों की सांद्रता बदलती रहती है, लेकिन कुल मिलाकर हवा में मौजूद तत्वों की संख्या और प्रभाव चिंताजनक स्तर पर है। इस अध्ययन को नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफॉर्मेशन (NCBI) में भी प्रकाशित किया गया है।
अध्ययन के अनुसार दिल्ली की हवा में एल्यूमिनियम, आयरन, टाइटेनियम, कॉपर, जिंक, क्रोमियम, निकल, आर्सेनिक, मोलिबडेनम, क्लोरीन, फॉस्फोरस, सल्फर, पोटैशियम, लेड, सोडियम, मैग्नीशियम, कैल्शियम, मैंगनीज और ब्रोमीन जैसे तत्व पाए जाते हैं। ये सभी तत्व सांस के जरिए शरीर में प्रवेश कर श्वसन रोग, हृदय रोग और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकते हैं।
आईपी यूनिवर्सिटी के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सुमित डूकिया के अनुसार, “हवा में मौजूद ये हानिकारक तत्व मानव स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा हैं। इनमें से अधिकांश तत्व मानव गतिविधियों से उत्सर्जित होते हैं। जब तक इनके स्रोतों पर प्रभावी नियंत्रण नहीं किया जाएगा, तब तक प्रदूषण को कम करना संभव नहीं है।”
विशेषज्ञों का मानना है कि वाहनों के उत्सर्जन, औद्योगिक गतिविधियों, निर्माण कार्य और खुले में कचरा जलाने जैसे स्रोतों पर सख्ती से नियंत्रण करके ही दिल्ली की हवा को सांस लेने लायक बनाया जा सकता है।