डॉ. काउंट सीज़र मैटी: इलेक्ट्रो होम्योपैथी के जनक और चिकित्सा विज्ञान के विद्वान
डॉ. काउंट सीज़र मैटी, इटली के महान चिकित्सक और इलेक्ट्रो होम्योपैथी के जनक थे। उन्होंने 1865 में होम्योपैथी की कमियों को दूर कर नई चिकित्सा प्रणाली विकसित की। अपने जीवन में उन्होंने महिला और बच्चों सहित अनेक मरीज़ों का सफल इलाज किया और भारत में भी इस चिकित्सा पद्धति को फैलाया।
UNITED NEWS OF ASIA. महेश किंगे, नेपा नगर | डॉ. काउंट सीज़र मैटी का जन्म 11 जनवरी 1809 को इटली के बोलोग्ना शहर के रोचेटा में हुआ। वे एक धनी और ज़मींदार परिवार से थे, जिससे उन्हें उच्च शिक्षा का अवसर मिला। पिता के निधन के बाद उन्होंने परिवार की संपत्ति और जागीर का प्रबंधन संभाला। 1847 में पोप और ऑस्ट्रिया के बीच युद्ध के दौरान उन्होंने अपनी कुछ ज़मीन दान कर पोप से काउंट की उपाधि और लेफ्टिनेंट कर्नल का दर्जा प्राप्त किया।
डॉ. मैटी ने रोम में संसद में भी हिस्सा लिया, लेकिन उन्हें जनसेवा और राजनीति में संतोष नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने चिकित्सा विज्ञान का अध्ययन करना शुरू किया। एलोपैथी और होम्योपैथी में उनका गहन अध्ययन हुआ, लेकिन होम्योपैथी में उन्हें कुछ कमियाँ दिखाई दीं। 1865 में, पैरासेल्सस के सिद्धांतों का उपयोग करते हुए उन्होंने इलेक्ट्रो होम्योपैथी की स्थापना की।
इस पद्धति में केवल 114 गैर-ज़हरीले पौधों का उपयोग किया गया, जिससे रोगियों को सुरक्षित और प्रभावी इलाज मिल सके। डॉ. मैटी की इलेक्ट्रो होम्योपैथिक दवाओं ने जल्द ही कई जटिल रोगों का सफल उपचार किया और उनकी शोहरत पूरे यूरोप में फैल गई। 1869 में पोप ने उन्हें सेंट टेरेसा अस्पताल में अलग डिपार्टमेंट खोलने का अवसर दिया।
डॉ. मैटी ने इलेक्ट्रो होम्योपैथी पर कई किताबें लिखीं और इसे देश-विदेश में प्रचारित किया। उनके सिद्धांतों और दवाओं को डॉ. लुट्ज़, डॉ. गिम्पल, डॉ. रिगार्ड और अन्य विद्वानों ने स्वीकार किया। 1895 में उन्होंने दक्षिण भारत के बेंगलुरु में एक अस्पताल के निर्माण के लिए दान दिया।
अपने जीवनकाल में उन्होंने अनेक रोगियों का सफल इलाज किया, भारत और विदेश में चिकित्सा सेवा दी। डॉ. मैटी का कोई पुत्र नहीं था, इसलिए उनके दामाद डॉ. एम.बी. मैटी ने उनके कार्य और दवा निर्माण का उत्तराधिकारी बनकर काम संभाला।
डॉ. काउंट सीज़र मैटी का निधन 1896 में रिसेटा में हुआ। उनके योगदान और आविष्कार ने इलेक्ट्रो होम्योपैथी को विश्वभर में एक मान्यता प्राप्त चिकित्सा पद्धति बना दिया। उनका जीवन चिकित्सा, जनसेवा और विज्ञान के प्रति समर्पण का प्रतीक है।